भोपाल: कोरोना की भयावह महामारी और अन्य मौसमी बीमारियों के दौरान मरीजों का भारी दबाव बनता है। इसके चलते सभी मरीजों को समय पर और सुविधाजनक इलाज नहीं मिल पाता है। 

इसके चलते दूसरे अस्पतालों में भी रेफर करना पड़ता है। इस स्थिति को देखते जेपी अस्पताल में बेड संख्या बढ़ाए जाने की तैयारी की जा रही है। शुरुआती तौर पर यहां सौ बिस्तर का अस्पताल बनाए जाने की तैयारी है।

जानकारी के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा आशंका जताई जा रही है कि आगामी दो साल में जेपी अस्पताल में कम बिस्तर के चलते मरीजों को भर्ती करने में परेशानी होगी। इसके चलते शासन ने यहां ओपीडी ब्लॉक के ऊपर 100 बिस्तर के वार्ड बनाने की मंजूरी दी है। 

अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि सौ बिस्तर वाले वार्ड बनाने के लिए डिजाइन तैयार हो गई है। इसके अलावा 270 बिस्तर का तीन मंजिला अलग अस्पताल भी बनाया जाना है। 

पावर स्टेशन शिफ्ट किए जाने के बाद इसका भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। काम शुरू होने के बाद डेढ़ साल के भीतर वार्ड तैयार हो जाएंगे। यहां पर मेडिसिन और सर्जरी के मरीजों को भर्ती किया जाएगा। मौजूदा ओपीडी ब्लॉक दो मंजिला है। एक मंजिला में सौ बिस्तर के वार्ड तैयार होंगे। इसमें सभी विभागों की ओपीडी के अलावा पैथोलॉजी लैब और डायलिसिस यूनिट है।

270 बिस्तर का अलग अस्पताल होगा..

जेपी अस्पताल परिसर में ही 270 बिस्तर का एक अलग अस्पताल भी बनाया जाना है। यह अस्पताल मौजूदा ओपीडी भवन से लगा हुआ नाले की तरफ बनाया जाएगा। भूतल के अलावा तीन मंजिला इस भवन में वार्ड के साथ ही सभी विभागों के ऑपरेशन थियेटर, पैथोलॉजी लैब, सोनोग्राफी और एक्स रे की सुविधा होगी। 

बता दें कि यह भवन करीब साल भर पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन जहां पर भवन बनाया जाना है वहां अभी बिजली का सब स्टेशन बना हुआ है। सब स्टेशन को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए एक बार टेंडर हुआ, लेकिन कोई निविदाकार शामिल नहीं हुआ। 

दूसरी बार टेंडर जारी किया गया है। स्टेशन शिफ्ट किए जाने के बाद भवन बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। काम शुरू होने के बाद डेढ़ साल में इसे पूरा करने की समय सीमा है। इसका निर्माण पीआईयू को करना है। 

नया अस्पताल भवन बनने के बाद पुराने अस्पताल को गिराने की तैयारी है, क्योंकि यह करीब 80 साल पुराना हो गया है।

इसलिए बिस्तर बढ़ाने की पड़ी जरूरत..

जेपी में कुल 430 बिस्तर है। इनमें 100 बिस्तर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा कोरोना, डेंगू, स्वाइन फ्लू के लिए वार्ड तैयार किए गए हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र में 10 बिस्तर है। 

ऐसे में मेडिसिन, सर्जरी, हड्डी विभाग के वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह कम पड़ जाती है। महिला मेडिकल वार्ड सबसे छोटा है। दो बिस्तरों के बीच तीन फीट की दूरी होनी चाहिए, लेकिन एक-एक फीट की दूरी में बिस्तर लगाए गए हैं।