आशीष चौबे 

जिसके अनुसार गुजरात, हिमाचल के बाद आने वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव स्थानीय नेता के चेहरे पर नही लड़े जायेंगे। चुनाव में सिर्फ और सिर्फ मोदी फेस होंगे।

जीत के बाद भाजपा पुराने नेताओं के बजाय नए चेहरों को मौका देने के मूड में हैं। मतलब साफ कि इस चुनाव में शिवराज, रमन सिंह, वसुंधरा राजे जैसे धाकड़ नेता फेस नही होंगे। 

इस रणनीति के पीछे तर्क भी है| दरअसल साल 2018 के चुनावों में शिवराज ,रमन सिंह और वसुंधरा राजे पार्टी का फेस थे| ये मुख्यमंत्री थे लेकिन चुनावों में आम जनता ने इन सभी दिग्गजों के नेतृत्व वाली सरकार को सिरे से नकार दिया। सीधी भाषा में कहा जाए तो तीनों नेता जनता के भरोसे की कसौटी पर खरा नहीं उतरे। 

हालांकि मप्र में फिर से भाजपा की सरकार बनी लेकिन जनमत से नही बल्कि जोड़तोड़ से। 

ऐसी स्थिति में फिर से हारे हुए नेताओ के काँधे पर सवार होकर चुनावी संग्राम  में उतरना, भाजपा को भारी पड़ सकता है। 

मोदी का नाम अब भी बोलता है। 

मिसाल यूपी रहा, समीक्षकों के अनुसार भले ही फेस योगी थे लेकिन एंटी इनकंबेंसी को कम करने का क्रेडिट मोदी की खाते में ही गिरता है। मतदाताओं का यह भी कहना रहा कि योगी अपनी जगह हैं, लेकिन भाजपा को वोट देने की एक बड़ी वजह मोदी हैं। 

 सूत्रों की खबर में कितनी सच्चाई यह तो आने वाले वक्त की झोली में है लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रदेश स्तर पर कोई फेस रहे या न रहे, चुनावों के होर्डिंग,पोस्टर,सभाओं और नारों में मोदी ही चमकना है|

शिवराज ही कराएंगे चुनाव:

इधर राज्य सरकार के प्रवक्ता व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि अब कांग्रेस का सूर्य अस्त होने की ओर है, शिवराज ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। उज्जैन में आज सुबह मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा भाजपा को कोई टक्कर नहीं दे सकता।