भोपाल: राज्य सरकार ने अनियमितता करने वाले जल संसाधन विभाग के एक कार्यपालन यंत्री को चेतावनी देकर उसका प्रकरण खत्म कर दिया है। इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि अनुबंध के अंतर्गत पीपल्याकलां तालाब योजना मरम्मत सुदृढ़ीकरण एवं पुनरूद्वार कार्यों के अंतर्गत नहर की लाइनिंग कार्य में गुणवत्ताहीन कार्य कराने वाले तथा गुणवत्ताहीन कार्यों की माप दर्ज करने वाले अधीनस्थ अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री पर नियंत्रण की कमी हेतु उत्तरदायी पाये जाने पर तत्कालीन कार्यपालन यंत्री राजगढ़ को भविष्य के लिये सजगतापूर्ण कार्य करने एवं अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण रखने हेतु चेतावनी देते हुए आरोप समाप्त किये जाने का प्रशासकीय निर्णय लिया गया है। इसलिये ओपी गुप्ता को भविष्य के लिये सजगतापूर्ण कार्य करने एवं अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण रखने हेतु चेतावनी देते हुए प्रकरण समाप्त किया जाता है।

दोषमुक्त एसई को मिलेगा निलम्बन काल का वेतन:

इधर जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री बाणसागर मंडल रीवा तथा प्रभारी मुख्य अभियंता गंगा कछार रीवा एमपी चतुर्वेदी को विभागीय जांच में दोषमुक्त करने पर उन्हें निलम्बनकाल का वेतन एवं भत्ता देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि एमपी चतुर्वेदी ने मप्र कार्य-विभाग मैन्युअल-1983 के तहत आर्बिट्रेटर नियुक्त नहीं किये जाने के बावजूद मनमाने ढंग से मेसर्स विजय कुमार मिश्रा एण्ड कंपनी एवं कार्यपालन यंत्री अपर पुरवा नहर संभाग रीवा के प्रकरण में सुनवाई करते हुये निविदाकार के पक्ष में 91 लाख 62 हजार 944 रुपये का निर्णय पारित किया तथा इस अनियमिता के लिए एमपी चतुर्वेदी 25 मार्च 2010 को निलंबित किया जाकर 28 अप्रैल 2010 को आरोप-पत्रादि जारी किये जाकर विभागीय जांच सस्थित की गयी।

प्रकरण के प्रचलित रहते चतुर्वेदी को 28 जून 2011 बहाल किया गया। विभागीय जांच प्रकरण में चतुर्वेदी के विरूद्ध आरोप सिद्ध नहीं होने के फलस्वरूप उन्हें विभागीय आदेश 29 जून 2020 द्वारा दोषमुक्त कर प्रकरण समाप्त किया गया, परन्तु तत्समय चतुर्वेदी की निलंबन अवधि का निराकरण नहीं किया गया। इसलिये राज्य शासन ने अब चतुर्वेदी को निलंबन अवधि में प्राप्त किए गए जीवन निर्वाह भत्ते की राशि का समायोजन कर शेष वेतन-भत्ते प्रदान कर, निलंबन अवधि को समस्त प्रयोजन हेतु कर्तव्य अवधि मान्य किया है।