पीएम ने कार्यक्रम में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि- भारत के लिए प्रकृति और पर्यावरण, पशु और पक्षी, केवल स्थिरता और सुरक्षा के बारे में नहीं हैं। हमारे लिए यह हमारी संवेदनशीलता और आध्यात्मिकता का आधार भी है। आज 21वीं सदी का भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी परस्पर विरोधी क्षेत्र नहीं हैं। 'प्रोजेक्ट चीता' पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण की दिशा में सरकार का एक प्रयास है।
आगे बोलते हुए पीएम ने कहा- इस दिन आमतौर पर मेरी यही कोशिश रहती है कि मैं अपनी मां के पास जाऊं, उनके चरण स्पर्श करूं और आशीर्वाद मांगूं। आज मैं उनके पास नहीं जा सका, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों और गांवों में कड़ी मेहनत करने वाली लाखों माताएं आज यहां मुझे आशीर्वाद दे रही हैं।
फिर उन्होंने कहा- पिछली सदी के भारत और इस सदी के नए भारत के बीच एक बहुत बड़ा अंतर हमारी नारी शक्ति के प्रतिनिधित्व के रूप में आया है। आज के नए भारत में पंचायत भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन तक नारी शक्ति का झंडा लहरा रहा है।
पिछले 8 वर्षों में, हमने स्व सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए हर तरह से मदद की है। आज देश भर में 8 करोड़ से अधिक महिलाएं इस अभियान से जुड़ी हैं। हमारा लक्ष्य है कि इस अभियान से हर ग्रामीण परिवार से कम से कम एक बहन जुड़े। हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं पैदा करने के लिए लगातार काम कर रही है। 'एक जिला, एक उत्पाद' के माध्यम से हम हर जिले से स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
पीएम ने आगे कहा- देश में सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। भारत के प्रयासों से, संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाज के वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है। वहीं आगे बोलते हुए पीएम ने कहा- नामीबिया से आज लगभग 75 साल बाद भारत आए आठ चीते आए है, जो कि हमारे मेहमान हैं। मैं आप सभी, सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दें और उनका गर्मजोशी से स्वागत करें।