भोपाल: राज्य सरकार के वन विभाग ने पुलिस की तरह मोबाइल कॉल रिकार्ड एवं लोकेशन ट्रेस करने का अधिकार फिर से मांगा है। दरअसल, राज्य में बाघ सहित अन्य वन्यजीवों के शिकारियों पर वन विभाग वन्यजीव कानून के तहत कार्यवाही करता है तथा कई बार इसमें अंतर्राज्यीय एवं अंतर्राष्ट्रीय गिरोह भी सामने आते हैं। सीधे उक्त अधिकार न होने से वन विभाग को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा इसके लिये उसे पुलिस विभाग की मदद लेनी पड़ती है जिसमें काफी समय लग जाता है। पिछले दिनों हुई राज्य स्तरीय स्टियरिंग कमेटी की बैठक में वन विभाग ने यह मुद्दा उठाया था।
इस बैठक में वन विभाग ने वन्यजीव अपराधों में कार्यवाही करने वाली टीम में उपयुक्त एवं युवा वनाधिकारियों को पदस्थ करने, उन्हें स्पेशल भत्ता देने जोकि कुल वेतन के 30 प्रतिशत के बराबर हो तथा बीएनएस 2023 की धारा 218 के तहत क्षेत्रीय वन अधिकारियों को संरक्षण देने की मांग भी की तथा इस धारा में प्रावधान है कि वनाधिकारी द्वारा लोक सेवक के रुप में कार्य करने के दौरान यदि उस पर किसी अपराध का आरोप लगाया जाता है तो उसे कोई भी न्यायालय, लोकपाल या लोकायुक्त संज्ञान में नहीं लेगा।