भोपाल: राजधानी भोपाल में राज्य सरकार के शासकीय आवासों का केंद्र सरकार के अफसरों को भी आवंटन किया जाता है लेकिन इनसे उनके हाउस रेंट एलाउन्स के बराबर किराया लिया जाता है जो तीस हजार रुपये प्रति माह से भी ज्यादा होता है।
जबकि राज्य के सेवकों से रियायती दर पर बहुत ही कम किराया लिया जाता है, जोकि 6 हजार रुपये लेकर 200 रुपये प्रति माह तक है। लेकिन अब केंद्र सरकार के अफसरों से भी ऐसा ही रिायती किराया लेने के लिये प्रावधान किया जा रहा है जिसकी मंजूरी के लिये इसे केबिनेट में प्रस्तुत किया जायेगा।
दरअसल, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त मप्र एवं छत्तीसगढ़ मोहनीश वर्मा ने गत अगस्त माह में राज्य सरकार से लिखित आग्रह किया था कि उनसे हाउस रेंट एलाउन्स के बराबर किराया लेने के स्थान पर रियायती दर पर किराया लिया जाये।
इस संबंध में उन्होंने केंद्र सरकार का एक सर्कुलर भी संलग्न किया था जिसमें कहा गया है कि केंद्र के अफसरों से भी राज्य के अफसरों की तरह रियायती दर पर किराया लिया जाये। मोहनीश वर्मा को भोपाल में राज्य सरकार का सी-2/16, चार इमली आवास आवंटित है। वे किराये के संबंध में राज्य सरकार से केंद्र के सर्कुलर के संबंध में स्पष्टीकरण भी चाह रहे थे।
वर्मा के पत्र को परीक्षण के लिये राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत कार्यरत संपदा संचालनालय को भेजा गया। पत्र पर वित्त विभाग से भी अभिमत मांगा गया। लेकिन पाया गया कि राज्य के गृह विभाग ने 1 अक्टूबर 2014 से जो किराया निर्धारित करने का आदेश जारी किया है उसमें साफ लिखा है कि भारत सरकार के अफसरों एवं कर्मचारियों को आवंटित राज्य के "बी" से लेकर "आई" तक के शासकीय आवासों का किराया आवंटिती को मिलने वाले हाउस रेंट एलाउन्स के बराबर लिया जायेगा।
चूंकि केंद्र सरकार के अधिकारी-कर्मचारी भी शासकीय सेवक होते हैं, इसलिये अब उनसे भी रियायती दर किराया लेने का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इस ड्राफ्ट में यह भी उल्लेख किया जा रहा है कि केंद्र के सेवक का भोपाल में उसके विभाग से तो कोई केंद्रीय आवास उपलब्ध नहीं है। यदि उपलब्ध है तो उसे रियायती दर के किराये की पात्रता नहीं मिलेगी।