तीन महीने की एक्सरसाइज 17 दिन में करने की चुनौती..

भोपाल: मप्र के नये पुलिस महानिदेशक के चयन का मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है। 'सरकार' की नजर इसके लिये सुधीर सक्सेना से लेकर राजीव टंडन तक के नामों पर आकर ठहरती दिख रही है। इस दौड़ में आधा दर्जन आईपीएस अफसर हैं और आगामी चार मार्च विवेक चौहरी के रिटायरमेंट के साथ ही डीजीपी पद खाली हो रहा है। बावजूद अभी तक यूपीएससी के लिये भेजे जाने वाले तीन नामों के पैनल को 'सरकार' से मंजूरी नहीं मिली है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि 1987 बैच के आईपीएस सुधीर सक्सेना समेत इसी बैच के पवन जैन और अरविंद कुमार के नाम सीनियरिटी के हिसाब से ऊपर है, लेकिन अंतिम तौर पर नामों का पैनल ही यूपीएससी को नहीं भेजा गया है। सक्सेना अभी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं।

डीजीपी का चयन इसलिये पेचीदा है क्योंकि चयन का मामला कई प्रक्रियाओं से गुजरेगा, यूपीएससी की मंजूरी के बाद इसके लिए यूपीएससी की राज्य सरकार के साथ बैठक होगी। हालांकि गृह विभाग इस पद के लिये तमाम एक्सरसाइज करके संभावित नामों का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज चुका है। 

प्रस्ताव में अरुणा मोहन राव, राजीव टंडन, यूसी षडंगी और मिलिंद कानस्कर को छोड़कर 1992 बैच तक के अधिकारियों के नाम भेजे हैं। इसकी वजह यह है कि जिसे भी डीजीपी नियुक्त किया जाएगा, उसकी सेवानिवृत्ति में कम से कम छह माह का समय होना चाहिए। ये सभी अधिकारी इस अवधि के पहले सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

कौन है वो..

खास बात यह है कि पुलिस सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार जिस दिन डीजीपी का पद रिक्त हो रहा है, उससे कम से कम तीन माह पहले नई पदस्थापना के लिए संघ लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य है। 

मगर राज्य सरकार ने इसमें काफी देर कर दी है। दबी जुबान कहा जा रहा है कि एक ऐसे अफसर को मौका देने के लिये प्रस्ताव भेजने में देरी की जा रही है, जिनका सेवाकाल कम बचा है।