देशभर में मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य भारत एवं विदर्भ क्षेत्र अभी भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं। भारतीय मौसमीय परिस्थितियों का वर्तमान स्वरूप यह संकेत दे रहा है कि आगामी कुछ दिनों में देश के बड़े हिस्से में मौसम तेजी से करवट ले सकता है।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में दक्षिण भारत एवं बंगाल की खाड़ी के क्षेत्रों तक सक्रिय है तथा अगले 3-4 दिनों में इसके केरल, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण मानसून को लगातार ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।

मध्य भारत में गर्मी का प्रभाव बरकरार

हालांकि मानसून दक्षिण भारत में सक्रियता दिखा रहा है, लेकिन मध्य भारत एवं विदर्भ क्षेत्र में गर्मी अभी भी तीव्र बनी हुई है। देश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान महाराष्ट्र के गोंदिया में 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा वाशिम 43.8°C, वर्धा 43.5°C तथा तेलंगाना के खम्मम में 43.4°C तापमान रिकॉर्ड हुआ।

मध्यप्रदेश का नरसिंहपुर भी देश के सबसे गर्म स्थानों में शामिल रहा, जहाँ अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। यह दर्शाता है कि प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी लू जैसे हालात बने हुए हैं।

दक्षिण भारत में मानसून की सक्रियता

दक्षिण भारत में मानसूनी गतिविधियाँ लगातार मजबूत हो रही हैं। केरल के कोच्चि (विलिंगडन) में 24 घंटों के दौरान 92.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो देश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा कोझिकोड में 48 मिमी, मंगलुरु में 45 मिमी तथा बेंगलुरु में 46 मिमी वर्षा हुई। यह स्पष्ट संकेत है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है।

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण तथा विदर्भ से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली द्रोणिका के कारण पूर्वी एवं मध्य भारत में भी नमी बढ़ रही है।

मध्यप्रदेश में बदलने लगा मौसम

मध्यप्रदेश में इस समय दो प्रकार की मौसमीय स्थितियाँ दिखाई दे रही हैं। पश्चिमी एवं मध्य भागों में अभी भी गर्म एवं शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है, जबकि पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी जिलों में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज होने लगी हैं।

सतना में 24 घंटों के दौरान 35 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो यह संकेत देती है कि प्रदेश के पूर्वी भागों में बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी सक्रिय हो रही है। भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, मंडला, बालाघाट एवं छिंदवाड़ा संभागों में आगामी दिनों में गरज-चमक, तेज हवाओं एवं हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बढ़ सकती है।

तेज हवाएँ और आंधी की गतिविधियाँ

देश के कई हिस्सों में तेज हवाएँ भी दर्ज की गईं। गुजरात के कांडला एयरोड्रम में सर्वाधिक औसत हवा की गति 22.2 किमी प्रति घंटा रही। मध्यप्रदेश के इंदौर में 16 किमी प्रति घंटा तथा भोपाल में 14.1 किमी प्रति घंटा की औसत हवा दर्ज हुई।

ओडिशा के झारसुगुड़ा में 74 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज पवन झोंका रिकॉर्ड किया गया, जो प्रबल गरज-चमक वाले बादलों की तीव्रता को दर्शाता है।

मध्यप्रदेश में मानसून कब?

सामान्य परिस्थितियों में मानसून मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्सों में जून के मध्य तक पहुँचता है। वर्तमान मौसम प्रणालियों को देखते हुए संभावना है कि जून के दूसरे सप्ताह से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियाँ मजबूत होने लगेंगी। अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से मिल रही नमी मानसून को आगे बढ़ाने में सहायक बन रही है।

आने वाले दिनों में प्रदेशवासियों को गर्मी से आंशिक राहत मिल सकती है, लेकिन गरज-चमक, तेज हवाओं एवं स्थानीय आंधी की घटनाएँ भी बढ़ सकती हैं। किसानों, यात्रियों एवं आम नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।