कांग्रेस अध्यक्ष पद की सियासत अब नामांकन दाख़िले तक आ पहुची है. बीजेपी की तरह ही, इस बार कांग्रेस में भी जो चर्चा में थे वह सिर्फ़ चर्चा तक ही सीमित रहे क्योंकि नामांकन की आख़िरी तारीख आते-आते जो वरिष्ट- वफ़ादार नेता आगे थे वह अब पीछे दिखे और पीछे नजर आने वाले नेता नामांकन पत्र दाखिल कर मुख्य किरदार की भूमिका में आ गए.
वैसे तो कई नामों पर चर्चा थी लेकिन ऐन मौके पर खड़गे ने थरूर के सामने नामांकन दाखिल कर अपनी एंट्री दर्ज करवाई. साथ ही इस रेस में केएन त्रिपाठी का नाम भी शामिल हैं लेकिन अब कांग्रेस में सीधा मुकाबला मल्लिकार्जुन खड़गे Vs शशि थरूर हो गया है. बता दें कि खड़गे गांधी परिवार के काफ़ी करीबी तो वहीं थरूर बागी नेताओं में गिने जाते हैं.
खैर..! अब समय भी तय है (17 अक्टूबर को होगा मतदान) और दोनों चुने हुए खिलाड़ी भी मैदान में अपना दांव चल चुके हैं (नामांकन पत्र दाखिल). अब फैसला किसके पक्ष में होगा यह तो परिणाम 19 अक्टूबर को ही तय करेंगे. लेकिन मतदान न हो इसके लिए भी शायद प्रयास किये जा सकते है. क्योंकि नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आठ अक्टूबर है. अगर चुने हुए खिलाड़ियों में से कोई भी दो नामांकन वापस ले लेंगे तो एक खिलाड़ी बिना मतदान के ही जीत जायेगा. फ़िलहाल अब इसकी उम्मीद काफ़ी कम नजर आ रही हैं.
गहलोत-दिग्विजय क्यों हुए बाहर-
इस रेस में जिन नामों को पहले ही गांधी परिवार से हरी झंडी मिल चुकी थी आख़िरकार रेस से उन्हें क्यों बाहर किया गया? इसके बारे में भी जान लीजिये..! इस रेस में सबसे पहले नाम अशोक गहलोत Vs शशि थरूर था लेकिन सत्ता के मोह में आकर राजस्थान में सियासी बगावत कर गहलोत ने गांधी परिवार को सीधी चुनौती दी जिससे उनका नाम इस रेस से बाहर हो गया.
गहलोत के बाद गांधी परिवार के काफ़ी करीबी माने जाने वाले दिग्विजय सिंह थरूर के सामने इस रेस में शामिल हुए. इसके लिए उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीदा और अध्यक्ष पद की रेस में शामिल होने की बात भी कही थी. नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही खड़गे का नाम सामने आने के बाद खुद दिग्विजय सिंह इस रेस से बाहर हो गए. खबर यह भी है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को गांधी परिवार की तरफ से अचानक हरी झंडी दी गई. जिसके बाद दिग्विजय सिंह को खुद ही इस रेस से बाहर होना पड़ा.