इतिहासविद प्रो. कुसुमलता केडिया का खुलासा| भारत के विभाजन का मुख्य निर्णय तो अंग्रेजों, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका ने राजनीतिक कारणों से लिया।
भारत राष्ट्र के भीतर इस प्रकार एलियन और अजनबी तथा एनिमी स्टेट बनाने का मूल कारण यह है। गांधी नेहरू और जिन्ना तो खिलौने हैं उनके।
इसलिए दोनों महायुद्ध के बाद भारत को एक ही राष्ट्र रहने देना अपने लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है और बहुत बड़ा खतरा हो सकता है, यह उनका अनुमान था। क्योंकि वह भारत को भी अपने ही जैसा राष्ट्र मानते थे जो शक्तिशाली होने पर अन्य को दबाए। इसलिए उन्होंने भारत को कमजोर करने का निश्चय किया।
उसमें एक बड़ा कारण यह भी बना कि जवाहरलाल नेहरू का झुकाव स्टालिन की ओर था और स्टालिन के सोवियत संघ से इंग्लैंड फ्रांस और अमेरिका अपने लिए भविष्य में खतरा देखते थे।
इसलिए उन्होंने तय किया कि भारत का एक बहुत बड़ा हिस्सा लगभग आधा हिस्सा इससे अलग कर दिया जाए और विशेषकर वह हिस्सा अलग किया जाए जो खनिज पदार्थों तथा बहुमूल्य औषधियों एवं अन्य अनेक प्रकार से समृद्ध है और जो युद्ध की सामग्री तथा युद्ध में सहायक सामग्री उपलब्ध कराने में उनके काम आते रहे और जो सोवियत संघ के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो।
इस बड़े हिस्से को काटने का बहाना क्या बनाया जाए?
इसके लिए उन्होंने हिंदू मुस्लिम वाली बात को बहुत हवा दी।
सच यह है कि भारत राष्ट्र के भीतर जो यह Enemy States, Alien States शत्रु राज्य और पराई चेतना वाले राज्य खड़े किए गए, उसका हिंदू मुसलमान से कोई विशेष संबंध नहीं था।
हिंदू मुसलमान समस्या को tool बनाया गया, उपकरण बनाया उन्हें, क्योंकि बंटवारे में जो हिस्से पाकिस्तान को दिए गए पूर्व और पश्चिम में, इनमें से पूर्वी हिस्से में बाद में बांग्लादेश बना, वहां मुसलमानों की आबादी से बहुत कम हिंदुओं की नहीं थी। हिन्दू आबादी वहां बहुत अधिक थी।
काफी उल्लेखनीय जनसंख्या हिंदुओं की थी। पश्चिमी पाकिस्तान कहे जाने वाले हिस्से में और पूर्व में बांग्लादेश में हिंदुओं की संस्थाओं की बडी संख्या थी। हिंदू विद्या, ज्ञान ,संस्कृति और धर्म की संस्थाये इन क्षेत्रों में भरी पड़ी थी।
इसलिए मुसलमान समस्या को तो बहाना बनाया गया और यह दोनों ही समृद्ध क्षेत्र भारत से काट दिए गए ताकि सोवियत संघ के प्रभाव वाला जवाहरलाल नेहरू इन का उपयोग अमेरिका इंग्लैंड और फ्रांस के विरुद्ध तथा सोवियत संघ के पक्ष में न कर सके।
क्योंकि जो अनेक मुस्लिम बहुल इलाके थे वह तो पाकिस्तान में शामिल नहीं किए गए। जिनमें बिहार और उत्तर प्रदेश का बहुत बड़ा इलाका आता है। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की जनसंख्या बहुत थी और उसके भीतर काटकर तो कोई पाकिस्तान नहीं बनाया गया और पंजाब में तथा बंगाल में जहां हिंदू जनसंख्या हिंदू मंदिर हिंदू संस्कृति और विद्या की संस्थाएं भरी पड़ी थी, उन्हें काट दिया।
क्योंकि वहां बहुत सारे संसाधन थे जिन्हें इंग्लैंड फ्रांस और अमेरिका अपने कब्जे में लेना चाहता था। जवाहरलाल नेहरू का कम्युनिस्ट झुकाव इसका एक मुख्य कारण बना और उन्हें खतरा लगा और इसके लिए उन्होंने गांधी और जिन्ना को जो कि उनके अनुयायी थे अंग्रेजों के, उनको उपकरण बनाया और नेहरू को लालच दिया कि तुम हमारी बातें मान लो तो फिर हम तुमको शासक बना देंगे।
1870 ईस्वी में पहली बार जर्मन नेशन स्टेट का उभार हुआ। उसके पहले तक यूरोप में जर्मन राष्ट्र नाम की कोई भी वस्तु कहीं थी नहीं।
बिस्मार्क ने पहली बार जर्मनी को एक राष्ट्र के रूप में एकीकृत किया। उसके पहले 300 से अधिक छोटी-छोटी राजनीतिक इकाई में अलग-अलग रूप में वह क्षेत्र बिखरा हुआ था। जर्मन हूण शब्द का तद्भव रूप है। यह बात यूरोप के सभी लोग जानते हैं।
तो बिस्मार्क ने कहा कि जहां जहां कभी हम हूणों का वास रहा है और प्रभाव रहा है, वह समस्त क्षेत्र जर्मनी का है और उस पर हम जर्मन लोग अपना आधिपत्य स्थापित करेंगे।
जर्मनी के एक नेशन स्टेट के रूप में उभार के बाद यूरोप का राजनीतिक संतुलन अचानक लड़खड़ाने लगा और इंग्लैंड तथा फ्रांस आदि उस समय के बड़े यूरोपीय राज्य आशंकित हो गए कि हमारा तो अस्तित्व ही मिट सकता है| इससे जो रणनीति चली, उसका परिणाम प्रथम महायुद्ध के रूप में सामने आया और बाद में वही द्वितीय महायुद्ध के रूप में भी सामने आया।
इन दोनों युद्धों के द्वारा और उसके परिणाम के द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ ने इंग्लैंड फ़्रांस से मिलकर बड़े राज्यों को तोड़ा, राष्ट्रों को तोड़ा और नकली अस्वाभाविक और अवैध नेशन स्टेट जगह-जगह यूरोप में खड़े किए, अरब क्षेत्र और मध्य एशिया मे तथा एशिया में खड़े किए। मनमाने नेशन स्टेट बड़ी संख्या में इन दो महायुद्ध के परिणाम स्वरुप और इनके बीच की अवधि में बनाए और बिगड़ गए।