मोरबी के पुल हादसे को तीन दिन हो चुके हैं। हादसे के बाद से लेकर अब तक 135 लोगों की लाशें मिल चुकी हैं। मगर इस मामले में रोज नये खुलासे हो रहे हैं। बताया जाता है कि कई लोग अब तक लापता हैं। मगर कुछ मीडिया रिपोर्ट में पुल का रख-रखाव करने वाली कंपनी की कुछ अटपटी शर्ते भी सामने आ रही हैं। मामले को लेकर कहा जा रहा है कि यदि लोगों को लगता है कि यह पुल अचानक गिर गया, तो यह गलत है। बल्कि इस दर्दनाक हादसे की स्क्रिप्ट तो दो साल पहले ही लिख दी गई थी, लेकिन लापरवाह अधिकारियों की नींद ही नहीं टूटी और अब नतीजा देश के सामने है।
एक मीडिया रिपोर्ट की माने तो पुल का रखरखाव और मरम्मत का काम देखने वाली ओरेवा कंपनी ने जनवरी, 2020 में मोरबी जिला कलेक्टर को पत्र लिखा था। जिसमें कहा गया है कि हम पुल की अस्थायी मरम्मत करके इसे खोल देंगे। इस पत्र के बाद भी अधिकारी शांत बैठे रहे और इतना बड़ा हादसा हो गया।
पत्र से पता चलता है कि पुल के ठेके को लेकर कंपनी और जिला प्रशासन के बीच तना-तनी चल रही थी। ओरेवा ग्रुप पुल के रखरखाव के लिए एक स्थायी अनुबंध चाहता था। समूह ने कहा था कि जब तक उन्हें स्थायी ठेका नहीं दिया जाता तब तक वे पुल पर अस्थायी मरम्मत का काम ही करते रहेंगे। ओरेवा फर्म पुल की मरम्मत के लिए सामग्री का ऑर्डर नहीं देगी और वे अपनी मांग पूरी होने के बाद ही पूरा काम करेंगे।
मार्च में मिला स्थायी ठेका
बताया जा रहा है, कि तमाम लापरवाहियों के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से ओरेवा ग्रुप को ही स्थायी टेंडर दिया गया। जनवरी, 2020 में जारी इस लेटर के बाद भी पुल के संचालन और रखरखाव के लिए 15 साल के लिए ओरेवा ग्रुप के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। मार्च 2022 में मोरबी नगर निगम और अजंता ओरेवा कंपनी के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। यह अनुबंध 2037 तक वैध था। वहीं हादसे के बाद मोरबी नगर पालिका ने हादसे से पूरी तरह से पल्ला झाड लिया। नपा अधिकारी संदीप सिंह ने बताया कि ओरेवा ग्रुप ने अनुबंध के नियम व शर्तों का उल्लंघन किया है।
जांच में ये बात भी सामने आई है, कि केबल ब्रिज की केबल तक नहीं बदली गई थी पुल को रिनोवेट करने के बाद भी वही पुरानी जंग लगी हुई केबल लगी हुई थी। पुल का फ्लोर बदलकर नया लगा दिया गया था। पुरानी केबल नए फ्लोर का भार और साथ ही में उस पर चढ़े लगभग 400 लोगों का भार नहीं सह पाई। नतीजतन पुल ताश के पत्तों की तलरह ढ़ह गया। रविवार को हुए हादसे में 141 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। हादसे के ठीक 4 दिन पहले ही पुल को जनता के लिए खोला गया था।