सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले में जांच कमेटी का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया है। कोर्ट ने अपनी टेक्निकल कमिटी को जांच के लिए और समय दिया है। इसके बाद समिति को पेगासस मामले की जांच रिपोर्ट 28 जून तक देनी होगी।

कमेटी ने बनाया सॉफ्टवेयर -

जांच कमेटी के अनुसार, मई के अंत तक पूरी रिपोर्ट तैयार हो सकती है। कोर्ट में आज इस मामले पर सुनवाई हुई। जिसमें CJI ने कहा कि कमेटी ने जांच के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया है। समिति ने कहा कि वह मई के अंत तक अपनी जांच को अंतिम रूप दे देगी। समिति 4 सप्ताह में अपनी अंतिम रिपोर्ट पर्यवेक्षक न्यायाधीश को सौंपेगी और फ़िर इस मामले की सुनवाई जुलाई में होगी।

सीजेआई रमना ने कहा कि, हमें अब पेगासस मामले पर एक अंतरिम रिपोर्ट चाहिए। कमेटी ने अब तक 29 मोबाइल फोन की जांच की, कई लोगों से बात भी की। आम जनता से भी सुझाव मांगे गए, जिसके बाद कई लोगों ने प्रतिक्रियाएं दीं। जिसे फाइनल रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले इजरायली स्पाईवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर करीब 1400 लोगों के मोबाइल टैप किए जा चुके हैं। इसमें कई पत्रकारों, व्यापारियों, विपक्षी नेताओं और सरकार के मंत्रियों के नाम शामिल हैं। विपक्ष ने बार-बार केंद्र सरकार पर पेगासस का उपयोग करने का आरोप लगाया है, क्योंकि स्पाइवेयर कंपनी का दावा है कि वह सरकार के अलावा किसी भी निजी कंपनी या व्यक्ति को अपना सॉफ्टवेयर नहीं बेचती है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इस तथ्य को कभी स्वीकार नहीं किया। केंद्र ने संसद और सुप्रीम कोर्ट में Pegasus को खरीदने से इनकार कर दिया है। इसके बाद मामले की जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं। शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था, लेकिन सरकार ने सिर्फ इतना कहा था कि पेगासस नहीं खरीदा गया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार का जवाब पर्याप्त नहीं है और याचिकाकर्ताओं की दलीलें विचार करने लायक हैं। इस मामले पर कोर्ट ने यह भी कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, इसलिए सरकार के जवाब देने से पहले एक कमेटी बनानी चाहिए। इसके बाद मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया, जो अब जल्द ही अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करेंगी।