भोपाल. टाइगर स्टेट के नौरादेही सेंचुरी में बाघों की तीसरी पीढ़ी ने कदम रखा है. बाघिन एन 112 ने दो शावकों को जन्म दिया है. सेंचुरी के गश्ती दल ने शावकों की तस्वीर कैमरे में कैप्चर की.

मध्य प्रदेश के सागर के सीमावर्ती चार जिलों की सीमा में फैला प्रदेश का सबसे बड़े क्षेत्रफल वाला नौरादेही अभ्यारण्य,वन्यप्राणियों के लिए आरामदायक और सुरक्षित आवास माना जाता है और इसी कारण अभ्यारण्य में बाघों के कुनबा लगातार बढ़ रहा है.

नौरादेही अभ्यारण्य में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघिन राधा और कान्हा बाघ को लाया गया था. पहली बार राधा ने तीन शावकों को जन्म दिया था जिनमें एक नर था तथा दो मादा थे. इन्ही में से एक बाघिन एन 112 ने दो शावकों को जन्म दिया है. तीसरी पीढ़ी के इन दो शावकों की आमद के साथ ही नौरादेही अभ्यारण में बाघों के कुनबा बढ़कर आठ से दस हो गया है. नौरादेही सेंचुरी, पन्ना नेशनल पार्क और रातापानी सेंचुरी के बीच कोरिडोर निर्मित करता है.

वन विभाग ने बाघ शावकों की पुष्टि की-

नौरादेही अभयारण्य में दिखाई दिए दो शावकों को लेकर डीएफओ सुंधाशु यादव ने पुष्टि की. यादव ने जारी बयान में कहा है कि अमले के कुशल प्रबंधन के और अधिकारियों के बेहतर मार्गदर्शन के कारण अभ्यारण्य में लगातार वाघों की संख्या बढ़ रही. सुरक्षा की दृष्टि से संपूर्ण अभ्यारण में निगरानी बढ़ा दी गई है.  बाघों के कुनबा बढ़ने से इस क्षेत्र में में पर्यटन को बढ़ने की संभावनाएं और बढ़ गई है जिसे लेकर अभ्यारण्य में तैनात अमले के साथ क्षेत्र में खुशी का माहौल है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में बाघ पुनर्स्थापना योजना अंतर्गत एक नर बाघ (किशन) व मादा बाघिन (राधा) को सेंचुरी में कान्हा टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाकर छोड़ा गया था. मादा बाघिन ने मई 2018 में 3 तथा नवंबर 2021 में दो शावकों को जन्म दिया. प्रथम बार जन्मे बाघ-बाघिन व्यस्क हो चुके हैं. इनमें से एन-112 ने दो शावकों को जन्म दिया है.