भोपाल: मप्र विधानसभा में अब याचना नहीं आवेदन शब्द का प्रयोग होगा। इसके लिये विधानसभा की नियम समिति ने याचिका समिति का नाम बदलकर आवेदन एवं अभ्यावेदन समिति कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि विधायकगण जनहित के मुद्दों जैसे स्कूल खोलने, सडक़ बनाने आदि से संबंधित मामलों में अपने हस्ताक्षर से विधानसभा में याचिकायें लगाते थे जिन्हें स्पीकर सत्र के दौरान कार्यसूची में भी शामिल करते थे। कार्यसूची में शामिल याचिकाओं पर विधानसभा की याचिका समिति सुनवाई करती है एवं अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करती है।

चूंकि याचिकायें अदालतों में लगाई जाती हैं तथा इन्हें विधानसभा में लगाना जनता का अपमान होता है क्योंकि जनता को अपनी समस्याओं के समाधान हेतु याचना नहीं करना चाहिये और वैसे भी लोकतंत्र, जनता के माध्यम से शासन होता है। इसलिये विधानसभा की नियम समिति ने याचिका समिति का नाम बदलकर आवेदन एवं अभ्यावेदन समिति किये जाने की सिफारिश की है तथा हाल के बजट सत्र में यह सिफारिश सदन में प्रस्तुत भी हो गई है जिस पर किसी भी विधायक ने कोई आपत्ति नहीं ली है। 

ज्ञातव्य है कि जिन याचिकाओं को विधायक अपने हस्ताक्षर से विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं उनका उल्लेख सदन की कार्यसूची में होता है जबकि जनता के द्वारा अपनी विभिन्न समस्याओं से संबंधित सीधे विधानसभा को दी जाने वाली याचिकाओं का उल्लेख कार्यसूची में नहीं होता है। आगे से विधायक द्वारा दी जाने वाली याचिका, आवेदन एवं जनता द्वारा दी जाने वाली याचिका, अभ्यावेदन कहलायेंगे।