इंदौर के अनाथालय में कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। अब तक तीन दिनों में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। चाचा नेहरू अस्पताल में मंगलवार सुबह 12 बच्चों को भर्ती कराया गया है। आश्रम प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की है। 12 बच्चों का इलाज जारी है। मरने वाले 3 बच्चों में से 2 को मिर्गी की बीमारी थी। एक की मौत का कारण पता नहीं चल पाया है।

कलेक्टर आशीष सिंह ने एडीएम को गहन जांच के आदेश दिए। वह मंगलवार सुबह भर्ती बच्चों के बारे में जानकारी लेने पहुंचे।

वहीं मामले को लेकर आश्रम संचालिका अनिता शर्मा ने कहा-

मरने वाले तीन बच्चों में से दो को मिर्गी की बीमारी थी। यहां के 204 बच्चों में से 51 को मिर्गी की बीमारी है। इनका जीवन काल छोटा होता है। कई बार मिर्गी से उनकी मौत हो जाती है। पोस्टमार्टम के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। यहां हर बच्चे पर उचित निगरानी रखी जाती है। स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की टीमें जांच के लिए पहुंची हैं।

वहीं एडीएम ने राजेंद्र रघुवंशी कहा- खाद्य सुरक्षा टीम जांच कर रही है। बाकी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के लिए डॉक्टरों की एक टीम पहुंची है।

अस्पताल पहुंचे कलेक्टर आशीष सिंह ने घटना को लेकर नया अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि पहले एक बच्चे की मौत की सूचना मिली थी। दो बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। डिहाइड्रेशन की बात सामने आई है। एडीएम के नेतृत्व में एक टीम जांच कर रही है। एक और बच्चे की मौत का कारण मिर्गी पाया गया है।

कहा जा रहा है कि आश्रम में कृष्ण को सबसे पहले डिहाइड्रेशन की समस्या हुई। इसके बाद बाकी बच्चों की हालत बिगड़ गई। कृष्णा अब स्वस्थ है। 12 साल का करण देवास जिले के सोनकच्छ का रहने वाला था। 15 माह पहले चाइल्ड लाइन के माध्यम से उसे आश्रम लाया गया था। जबकि जिले के नर्मदापुरम निवासी 7 वर्षीय आकाश को चाइल्ड लाइन ने 3 माह पहले आश्रम को सौंपा था।

आपको बता दें, कि इंदौर में पंचकुइया रोड पर श्री युगपुरुष धाम आश्रम में मानसिक रूप से विकलांग बच्चे रहते हैं। यहां अलग-अलग जिलों से चाइल्ड लाइन या अन्य माध्यम से बच्चों को भेजा जाता है। वर्तमान में 217 मानसिक रूप से विकलांग बच्चे (101 लड़के और 116 लड़कियां) हैं। सरकारी रिकॉर्ड में सभी बच्चों के साथ मां का नाम डॉ. अनिता शर्मा लिखा है। 10-15 साल पहले आए बच्चों में से एक-एक बच्चे की देखभाल 18 बेटियां कर रही हैं।