मध्यप्रदेश में पंचायती एवं नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे सामने आ चुके है। निकाय चुनाव के रिजल्ट के बाद से ही सत्ता पर काबिज दल (BJP) अपने संगठन को और कसने के मूड में नज़र आ रहा है।
शीर्ष नेतृत्व ने निकाय चुनाव में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन के तुरंत बाद ही "क्षेत्रीय संगठन महामंत्री" (MP/CG) के पद का दायित्व अजय जामवाल को दे दिया हैं, संगठन का यह फ़ैसला ठीक रिजल्ट के एक दिन बाद आया। संगठन के इस फैसले के बाद से ही पार्टी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्योंकि हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनाव में पार्टी ने पिछली बार की तुलना में इस बार आपेक्षित प्रदर्शन नहीं दिखाया।जहां बीजेपी ने पिछली बार सभी 16 महापौर की सीटों पर कब्ज़ा किया था, तो वहीं इस बार पार्टी सिर्फ़ 9 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है।
इस चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल बताने वाले लोग यह ज़रूर समझ गए होंगे की, पार्टी का वोटिंग प्रतिशत कम होना या फ़िर सीटों का आकड़ा गड़बड़ाना संगठन के लिए संतोषजनक नहीं है। शायद इसीलिए शीर्ष नेतृत्व विधानसभा चुनाव से पहले ही संगठन बदलाव में जुट गया है। आने वाले समय में यह गाज कई बड़े नेताओं पर भी गिर सकती हैं।
ताज़ा जानकारी के अनुसार, संगठन ने राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री शिवप्रकाश का केंद्र बदलकर भोपाल की जगह अब मुंबई कर दिया। इस बदलाव का सन्देश साफ़ है कि संगठन आने वाले समय में अपने कार्यकर्ताओं के दायित्वों में भी बदलाव कर सकता हैं।

संघ में हुए कई ज़रूरी बदलाव-
संघ में मौजूदा हालात को देखते हुए अब कई ज़रूरी बदलाव लागू हो सकते है। प्रदेश में संघ का सारा काम संगठन मंत्री हितानंद शर्मा संभाल रहे हैं। संगठन में चुनाव के बाद हुए ताज़ा बदलाव अब इस और इशारा कर रहे है कि हितानंद शर्मा को जल्द ही अपने दो सहयोगी के रूप में सह-संगठन मंत्री मिल सकते है। इन दोनों सह-संगठन मंत्रियों में से एक के पास मालवा तो वहीं दूसरें के बाद विंध प्रदेश की जिम्मेदारी होगी. साथ ही हितानंद शर्मा के पास मध्य की जिम्मेदारी होगी।