भोपाल। 14 जून यानि आज पूर्णिमा है। मंगलवार के दिन वट पूर्णिमा भी मनाई जा रही है. धार्मिक नजरिए से पूर्णिमा के दिन का बहुत महत्व है पर खगोलविज्ञान की दृष्टि से भी 14 जून की पूर्णिमा की खासी अहमियत है। दरअसल पूर्णिमा का दिन पूर्ण चंद्र का दिन माना जाता है यानि इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण स्वरूप में नजर आता है। मंगलवार को आ रही पूर्णिमा तो इस लिहाज से और भी अहम हो चुकी है. इस दिन चंद्रमा और भी ज्यादा विशाल दिखने जा रहा है। विज्ञान की भाषा में इसे सुपरमून कहा जाता है।
खगोलविज्ञानियों ने बताया कि 14 जून को शाम खास खगोलीय घटना होने जा रही है. इस दिन शाम को चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट रहेगा. खगोलविदों का कहना है कि अंडाकार पथ पर चलते हुए चंद्रमा हमारी पृथ्वी की परिक्रमा करता है. अंडाकार पथ पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए चन्द्रमा जब 361885 किमी से कम दूरी पर रहता है, तब पूर्णिमा का चन्द्रमा सुपरमून कहलाता है। इसे रोजमून, स्ट्रोबेरी मून और हनीमून भी कहा जाता है। यह घटना पूर्णिमा के दिन ही घटती है.
14 जून को चंद्रमा पृथ्वी से 357658 किमी की दूरी पर रहेगा. इस तरह मंगलवार का दिन सुपरमून का दिन भी होगा। इस वजह से मंगलवार को चंद्रमा अन्य दिनों की अपेक्षा बहुत विशाल नजर आएगा. खगोलविज्ञानी बताते हैं कि 14 जून को चंद्रमा माइक्रो मून की तुलना में करीब 14 प्रतिशत बड़ा दिखाई देगा. इतना ही नहीं, आज का चंद्रमा सामान्य दिनों की अपेक्षा 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई देगा।
मंगलवार को इस साल का पहला सुपरमून होगा- सबसे खास बात यह है कि 14 जून को इस साल का पहला सुपरमून होगा। आज शाम 5 बजकर 22 मिनट पर पृथ्वी से चंद्रमा की सबसे निकटता होगी। शाम को क्षितिज से उदित चंद्रमा का नजारा बेहद सुहाना होगा। खगोलविदों के अनुसार मंगलवार शाम को मून इलुजन की घटना के कारण चंद्रमा विशाल गोले के रूप में दिखाई देगा।