Chitrakoot : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मध्य प्रदेश के एक दिवसीय दौरे पर सतना जिले में स्थित भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट पहुंचे यहां पर वे यहां राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि पर दीन दयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए।
चित्रकूट में इस कार्यक्रम में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साथ कथावाचक मुरारी बापू भी शामिल हुए।
विद्यापीठ में भारत रत्न नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि पर 25 फरवरी से तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो चुका है। कार्यक्रम के अंतिम दिन राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में शाह शामिल हुए और नानाजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। पहला नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम, दूसरा दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा का लोकार्पण, और तीसरा राम दर्शन पर आधारित प्रस्तुति का लोकार्पण। अमित शाह ने इस मौके पर भगवान कामतानाथ को प्रणाम कर अपनी बात शुरू की। उन्होंने इस मौके पर नाना जी को याद किया।
केन्द्रीय गृहमंत्री शाह के चित्रकूट दौरे को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। चित्रकूट को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है। पांच आईपीएस सहित करीब 600 जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहेंगे। साथ मे अन्य व्यवस्थाओं के लिए 15 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट भी तैनात किए गए हैं। तीन दिन में अमित शाह का यह मध्य प्रदेश में दूसरा दौरा है। इससे पहले वे 25 फरवरी को भोपाल में आयोजित दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव भी खजुराहो से चित्रकूट पहुंचे और नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस मौके पर बोलते हुए गृहमंत्री शाह ने कहा,
तिल की तरह स्वयं को घिसते – घिसते राष्ट्र के लिए समर्पित कर देना सबके बस की बात नहीं होती। सरस्वती शिशु मंदिर के जरिये छोटे बच्चों में शिक्षा और संस्कार प्रदान करने में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को चरितार्थ करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। चित्रकूट की इस भूमि को भगवान श्रीराम एवं पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी ने पावन किया है, इस पुण्यभूमि को नानाजी ने अपना कर्मक्षेत्र चुना, ये हमारे लिए गौरव की बात है।
नानाजी के समग्र व्यक्तित्व को देखें तो उनका पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों से संस्कारित रहा। तिलक महाराज का राष्ट्रवाद और महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज यदि किसी एक व्यक्तित्व में देखने को मिलता है तो वह नानाजी का व्यक्तित्व है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को देखते हुए पूर्व राष्ट्रप्रति डॉ कलाम ने उन्हें राष्ट्रऋषि की उपाधि प्रदान की थी। वहीं, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने उन्हें भारत रत्न की उपाधि प्रदान की।
इंदिरा गांधी ने जब देश पर आपातकाल लगाकर लोकतंत्र पर कुठाराघात किया था, जनचेतना जागृत होने तथा 19 महीने के संघर्ष के बाद इंदिरा जी को आपातकाल हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उस दौरान जेपी के साथ नानाजी उन चुनिंदा नेताओं में से थे, जिन्होंने जनता पार्टी की रचना कर पहली गैर कांग्रेसी सरकार देश को देने में भूमिका निभाई थी।
दीनदयाल शोध संस्थान से मैं भी कुछ वर्षों तक जुड़ा रहा हूँ। संस्थान की आमुख पत्रिका ‘मंथन’ में भारतीय जनता पार्टी के कार्य और विचारों को स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया। मेरा मानना है कि ये संगठन के कार्यकर्ताओं के लिए किसी ग्रंथ से कम नहीं है। हर वर्ग और ग्रामों के विकास की अवधारणा देशभर में ‘मंथन’ के माध्यम से पहुंची है। मेरे जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के लिए सेवाकार्य के लिए रेफ्रेंस बुक ‘मंथन’ है।
नानाजी ने ग्रामोत्थान के माध्यम से अंत्योदय के सिद्धांत को जमीन पर उतारने के लिए चित्रकूट को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उनके द्वारा समाज के लिए किये गए असंख्य प्रयोग देशभर के ग्रामों का दृश्य और परिदृश्य बदलने का काम किया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 60 करोड़ से अधिक गरीबों को अपना पक्का मकान, शौचालय, गैस सिलेंडर, बिजली, अनाज समेत 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिला है। गरीबों का उत्थान नानाजी की कल्पना ही थी।
देश की राजनीति में एक ही कालखण्ड में भारत को दो महापुरुष मिले। नानाजी देशमुख और पं. दीनदयाल उपाध्याय जैसी महान शख्सियत ने स्वतंत्रता के समय तथा स्वतंत्र भारत में पाश्चात्य संस्कृति के समावेशित होने पर चिंता जाहिर की थी। पं. दीनदयाल जी ने एकात्म मानववाद का सिद्धांत प्रतिपादित किया, जो कि भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
दीनदयाल जी ने अंत्योदय के जरिये समाज के विकास का सिद्धांत दिया। उनका मानना था कि विकास के साथ विरासत को साथ रखकर देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। श्रद्धेय नानाजी ने कला, साहित्य, सेवा, शिक्षा समेत हर क्षेत्र में सशक्ति और समृद्धि के लिए कार्य किया। एक उम्र के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति को त्यागकर अपना जीवन एकात्म मानववाद को धरातल पर उतारने के लिए समर्पित किया। वे राजनीति में कमलवत रहे, अपने व्यवहार, संस्कार एवं कर्मठता से कई ऐसे सिद्धांत प्रस्तुत किये हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए राजनीति के आदर्श सिद्धांत रहेंगे।
जीवन का क्षण - क्षण और शरीर का कण- कण भारत माता को समर्पित कर शतायु जीवन उन्होंने जिया। राजनीतिक जीवन में रहकर अजातशत्रु रहे। मैंने अपने जीवन में नानाजी के विरुद्ध कभी कोई गलत बात नहीं सुनी। राजनीतिक जीवन में वे सदैव सर्वस्वीकृत रहे।
कई ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन दर्शन युग परिवर्तनकारी होता है। नानाजी देशमुख ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनके विचार और कार्य युग परिवर्तन के कारक हैं। जनसंघ की नींव डालने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि मैं अपने आप को बहुत धन्य मानता हूं जो मुझे नानाजी देशमुख का सान्निध्य मिला। नानाजी हम सबके लिए प्रेरणा पुंज के समान रहे। विद्यार्थी परिषद का कार्यकर्ता होने के नाते मैं उनसे कई बार मिला।
नानाजी ने राजनीति के क्षेत्र में भी मर्यादा का संदेश दिया। जब मोरारजी देसाई उनको अपने मंत्रिमंडल में स्थान देते हैं और वे उससे इंकार कर देते हैं। 1972 में दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से नानाजी ने कई प्रकार के नवाचार किये।
इस आयोजन में स्वामी अचलानंद जी महाराज, उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, मंत्री प्रतिमा बागरी, खजुराहो सांसद वीडी शर्मा, सतना सांसद गणेश सिंह समेत शोध संस्थान के कई पदाधिकारी शामिल हुए।