ट्रम्प ने सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात करते हुए लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने गुस्से में नेतन्याहू को ‘पागल’ कह दिया और उन पर एहसान न मानने का आरोप लगाया।
रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान पर हमले के बाद ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि अगर इजराइली कार्रवाई जारी रही तो वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत छोड़ सकता है। इससे नाराज ट्रम्प ने नेतन्याहू किया।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प ने गुस्से में कहा कि तुम पागल हो गए हो। आखिर तुम कर क्या रहे हो। अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूं। अब हर कोई तुमसे नाराज है। इस वजह से हर कोई इजराइल से भी नाराज है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रम्प खास तौर पर इस बात से परेशान थे कि लेबनान में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जा रहे हैं और एक हिजबुल्लाह कमांडर को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतें गिराई जा रही हैं।
फ्रांस ने इमरजेंसी बैठक बुलाई
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सोमवार को बुलाई गई आपात बैठक में अमेरिका को छोड़कर लगभग सभी देशों ने इजराइल से दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने और देश के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की। सुरक्षा परिषद की बैठक में फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन ने इजराइल की कार्रवाई की तीखी आलोचना की। दूसरी ओर अमेरिका ने अपनी टिप्पणियों में मुख्य रूप से ईरान और हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया।
फ्रांस के अनुरोध पर हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई जब इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र की सीनियर अफसर मार्था अमा अक्या पोबी ने सुरक्षा परिषद से कहा कि ब्लू लाइन के उत्तर में इजराइली सेना की मौजूदगी लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का स्पष्ट उल्लंघन है।
ईरान बोला- इजराइल नहीं रुका तो बाब अल मंडेब का हाल होर्मुज जैसा होगा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने चेतावनी दी है कि अगर इजराइल, लेबनान और गाजा में अपने सैन्य अभियान जारी रखता है तो ईरान के सहयोगी समूह कई नए इलाकों में इजराइल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। फार्स न्यूज के अनुसार, कानी ने कहा कि हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच सकते हैं जहां बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात की स्थिति समान हो जाए। उनका इशारा इस ओर था कि अगर एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान पैदा होता है तो दूसरे मार्ग में भी वैसी ही स्थिति बन सकती है।