तुरई आमतौर पर बहुत कम लोगों को प्रभावित करती है। लेकिन यह गुणों का भंडार है। तुरीय के गुणों की बात करें तो यह शीतल, मधुर, पित्त नाशक और अग्निवर्धक है।

यह श्वसन, बुखार, खांसी और मल की रुकावट से राहत देता है।

लाभ-

तुरियां कफनाशक और वायुनाशक है। यदि मानसून के दौरान इसे अधिक मात्रा में खाया जाए तो इससे गैस की जलन नहीं होती है। इसलिए जिन लोगों को पेट फूलने की समस्या हो उन्हें मानसून में ज्यादा तुरिया खाने की जिद नहीं करनी चाहिए।

भोजन में प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सावधानियां

1. तुरीया पचने में कठिन होता है और इसलिए मानसून के मौसम में बीमार लोगों के लिए तुरिया जड़ी बूटी फायदेमंद नहीं होती है।

2. बरसात के मौसम की सस्ती सब्जियां बीमार व्यक्ति के लिए फायदेमंद नहीं होती हैं।

3. यह जरूरी है कि एक स्वस्थ व्यक्ति भी लहसुन और तेल की अच्छी मात्रा में सब्जियां खाएं।

औषधीय गुण

1. तुरिया बेल की जड़ों को गाय के दूध या ठंडे पानी में घिसकर रोजाना सुबह तीन दिन तक पीने से पथरी ठीक हो जाती है।

2. तुरिया उन लोगों को ठीक करने में मदद करता है जिनके बगल में झाइयां होती हैं। तुरिया बेल की जड़ को गाय के मक्खन या अरंडी के तेल में घिसकर तीन बार मलने से चांदी ठीक हो जाती है।