जबलपुर। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी के रूप में जाने जाते जबलपुर में दो बेहद मजबूत ब्रिज बन रहे हैं. यहां दो बो-स्टिंग ब्रिज तेजी से तैयार हो रहे हैं जिन्हें दमोहनाका से मदन महल के बीच बन रहे फ्लाईओवर के हिस्से में शामिल किया जाएगा। पहला बो-स्टिंग ब्रिज रानीताल और दूसरा बल्देवबाग में बनेगा। ये दोनों ही ब्रिज स्टील से बनेंगे. ये इतने मजबूत होंगे कि भूकंप के तेज झटके भी झेल जाएंगे। लोक निर्माण विभाग—पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों का दावा है कि इस ब्रिज को आगामी 100 साल के हिसाब से तैयार किया गया है। इंजीनियरों ने बो-स्टिंग ब्रिज के 100 साल तक कुछ नहीं होने का दावा किया है। 

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री गोपाल गुप्ता के अनुसार इसके बनने से ब्रिज के नीचे से गुजरने वाले ट्रैफिक में किसी तरह का व्यवधान भी नहीं होगा। रानीताल में तो बो-स्टिंग ब्रिज का ढांचा रखा जा चुका है। ब्रिज को पूरी तरह बनकर तैयार होने में करीब डेढ़ माह का वक्त लगेगा। 

फ्लाईओवर के एक अन्य हिस्से में शामिल दूसरा बो-स्टिंग ब्रिज बल्दवेबाग में बनाया जाना है। यहां यातायात अधिक होने से कुछ दिक्कत आ रही है। वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। ऐसे में इंजीनियरों ने यहां स्टील के बो-स्टिंग ब्रिज बनाने का फैसला किया। रानीताल चौक व बल्देवबाग दोनों जगह 70-70 मीटर लंबे बो-स्टिंग ब्रिज बनाए जाने हैं। ये ब्रिज 70 टन वजन को झेलने की क्षमता के होंगे। इंजीनियरों का दावा है कि जबलपुर में आने वाले सामान्य भूकंप के झटकों को यह फ्लाईओवर पूरी तरह से झेलने की ताकत रखता है। भूकंप से इस ब्रिज को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा।