उत्तर के ज्योतिषपीठ एवं पश्चिम में द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती का शनिवार को निधन हो गया था। वे 99 साल के थे, उन्होंने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में अपने आश्रम में आखिरी सांस ली। आज उनको आश्रम में ही भू-समाधि दी गई जिसमें हज़ारों की संख्या में उनके शिष्य शामिल हुए।
ज्योतिष पीठ एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के दूसरे दिन नए उत्तराधिकारियों की घोषणा कर दी गई है। ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती होंगे। जबकि शारदा पीठ का नया शंकराचार्य सदानंद सरस्वती को बनाया गया है।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के समाधि में लीन होने से पहले ही सोमवार को इस बात की घोषणा कर दी गई। बता दें, कि शंकराचार्य परंपरा के अनुसार गुरु की समाधि से पहले ही उत्तराधिकारी की घोषणा की जाती है। स्वरूपानंद सरस्वती दो पीठों के शंकराचार्य थे। दोनों पीठों के लिए उन्होंने अलग-अलग उत्तराधिकारी तय किए थे। उनके निजी सचिव ने इस बात की घोषणा की।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का गंगा आश्रम मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर में स्थित हैं। स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म एमपी के सिवनी में 2 सितंबर 1924 को हुआ था। वे 1982 में गुजरात में द्वारका शारदा पीठ और बद्रीनाथ में ज्योतिर मठ के शंकराचार्य बने थे।