राजस्थान पुलिस ने उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या के आरोपियों के खिलाफ अवैध गतिविधि रोकथाम (UAPA) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में सीमा पार कनेक्शन समेत डिजिटल सबूतों की भी जांच की जा रही है। मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है।

राजस्थान के डीजीपी एमएल लाठर ने चर्चा में बताया कि उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या के मामले में यूएपीए एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह भी पता चला है कि दोनों आरोपियों के दूसरे देशों से संपर्क हैं। 

सीएम अशोक गहलोत ने भी कहा कि घटना में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है, इसलिए आगे की जांच अब एनआईए द्वारा की जाएगी। जिसमें राजस्थान एटीएस पूरा सहयोग करेगी। साथ ही सीएम ने घटना से पहले धमकी वाली FIR नहीं लिखने पर पुलिस से जवाब मांगा है। 

जानिए पूरा मामला-

उल्लेखनीय है कि उदयपुर के धनमंडी थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर दो युवकों ने दर्जी कन्हैयालाल पर धारदार हथियार से वार कर उसकी हत्या कर दी। पहले आरोपी कपड़े सिलने के बहाने दुकान पर आया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने इस्लाम के अपमान का बदला लेने के लिए कन्हैयालाल की हत्या की है। साथ ही उन्होंने पीएम मोदी पर भी विवादित बयान दिया था।

राजस्थान एसआईटी ने घटना में शामिल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों में मोहम्मद गौस और मोहम्मद रियाज शामिल है। उदयपुर के मुस्लिम बहुल इलाके किशन पोल में भीलवाड़ा जिले के रहने वाले आरोपी मोहम्मद रियाज का किराए का मकान है। मस्जिद में नमाज के दौरान रियाज ने घटना में शामिल एक अन्य आरोपी गौस से दोस्ती की। गौस राजस्थान के राजसमंद जिले का रहने वाला हैं।

घटना के शामिल दोनों आरोपियों के संबंध कराची स्थित सुन्नी इस्लामिक संगठन "दावत-ए-इस्लामी" से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, यह संगठन पाकिस्तान स्थित कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लबाक से जुड़ा है। जांच से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है।

पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी से संबंध-

दोनों आरोपियों ने अब तक की पूछताछ में खुलासा किया कि वे सुन्नी इस्लाम के सूफी बरेलवी पंथ से ताल्लुक रखते हैं।दोनों आरोपियों ने कराची में दावत-ए-इस्लामी संगठन से भी संबंध होने की बात स्वीकार की है। आतंकवाद रोधी अभियान के अधिकारियों के अनुसार, इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या उनके भारत में अन्य कट्टरपंथी सुन्नी संगठनों और 'मुस्लिम ब्रदरहुड' से संबंध हैं। कयास लगाये जा रहे है कि उनके संबंध ISIS से भी हो सकते है।

दावत-ए-इस्लामी क्या है?

कराची स्थित दावत-ए-इस्लामी का उद्देश्य कुरान और सुन्नत का प्रसार करना है। यह संस्था इस्लाम सिखाने और दुनिया में शरिया लागू करने की पैरवी करने के नाम पर लोगों को कट्टरपंथी बना रही है। पाकिस्तान में उनके बड़ी संख्या में समर्थक हैं और इस्लामिक देशों में ईशनिंदा कानून लागू करने के लिए काम करते हैं।