पूर्व मुख्यमंत्री एवं फायरब्रांड साध्वी उमा भारती एक बार फिर शराबबंदी को लेकर आंदोलन करने की धमकी दे रहीं है. शराबबंदी आंदोलन धमकी के दूसरे दिन ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आबकारी नीति में बदलाव करते हुए शराब की दुकानें दोगुनी कर दी. सांसद एवं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने भी कम मात्रा में शराब पीने हेल्थ के लिए लाभदायक बताकर उमा भारती के आंदोलन शुरू होने से पहले ही हवा निकाल दी. यानि शराबबंदी के मुद्दे पर उमा भारती अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ गई हैं. यह बात अलग है कि कांग्रेस के विधायक लक्ष्मण सिंह और जीतू पटवारी ने का समर्थन करते हुए साथ देने का वादा किया है.

पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती पार्टी की मुख्य धारा से हाशिए पर है.  भाजपा में एक-एक कर उनके समर्थक भी दूर होते जा रहे हैं. यही वजह है कि प्रदेश भाजपा की राजनीति में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए शराबबंदी जैसे मुद्दे को उछाल कर अखबारों की सुर्खियों में बनी रहना चाहती हैं. इसी कड़ी में साध्वी उमा भारती ने एक बार फिर शराबबंदी की आड़ में शिवराज सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है. हालांकि उमा भारती ने शराबबंदी को लेकर पहली बार आंदोलन करने की धमकी नहीं दी है. इसके पहले 15 जनवरी  21 शराबबंदी को लेकर प्रदेश में अभियान चलाने की घोषणा की थी. बीजेपी में कोई रिस्पांस नहीं मिलने पर उमा भारती अपने कदम पीछे हटाए 2 फरवरी को ट्वीट किया कि 8 मार्च महिला दिवस पर नशा मुक्ति अभियान शुरू किया जाएगा. 3 मार्च भी निकल गया पर उनका अभियान अनिश्चितता के भंवर जाल में फस कर रह गया. उत्तर प्रदेश विधान विधानसभा चुनाव में पार्टी हाईकमान का ध्यान अपनी ओर खींचने की मंशा से एक बार फिर शराबबंदी अभियान छेड़ने का राग अलापा है.

शराब से होगी 10 हजार करोड़ की भरपाई
नई आबकारी नीति के मसौदे के पहले पैराग्राफ में कहा गया है कि जीएसटी घाटे की भरपाई की व्यवस्था खत्म होने की बजह से दस हजार करोड़ का नुकसान होगा. इसकी भरपाई आबकारी के जरिये ही की जा सकती है. आपकारी के नए मसौदे में  शराब की दुकानों की संख्या दोगुनी कर दी है. अभी प्रदेश में देसी शराब की 2544 और विदेशी शराब की 1061 अधिकृत दुकानें हैं. नई नीति के मुताविक अब देसी शराब की दुकान पर विदेशी और विदेशी शराब की दुकान पर देसी शराब भी बेची जाएगी. मतलब साफ है बिना नई दुकान खोले ही दुकानें दोगुनी हो गईं. इसके अलावा अब शराब की दुकान पर गरीब अमीर का फर्क नही होगा. जहां बाबू लोग अंग्रेजी की बोतल लेंगे वहीं पर दिहाड़ी मजदूर अपना पौवा खरीद सकेगा. शराब के अहातों में भी देसी और विदेशी के ग्राहक साथ बैठकर शराब पी सकेंगे.