भोपाल: प्रदेश में अब मनरेगा के तहत बेरोजतगारी भत्ता नियमों के तहत मिलेगा। इससे पहले इसके भुगतान हेतु राज्य सरकार के कोई नियम ही नहीं थे। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार के लिये शहरों की ओर पलायन करने से रोकने के लिये सोलह साल पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून 2005 प्रभावशील किया था जिसके तहत जॉब कार्ड बनाने वाले प्रत्येक ग्रामीण को साल में सौ दिन रोजगार देने का प्रावधान किया था।
यदि साल भर में सौ दिन रोजगार नहीं दिया गया तो उसके बदले में बेरोजगारी भत्ता दिये जाने का भी कानून में प्रावधान किया गया था। केंद्र के इस कानून के तहत राज्य सरकार को बेरोजगारी भत्ते के भुगतान हेतु नियम बनाने थे जो उसने नहीं बनाये थे। लेकिन अब सोलह साल बाद ये नियम बना दिये गये हैं जिन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी बेरोजगार भत्ते के भुगतान की प्रक्रिया मप्र नियम नाम दिया गया है।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अब बेरोजगारी भत्ते का भुगतान उक्त नियमों के तहत किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके तहत, जॉब कार्ड बनवाने के बाद यदि ग्रामीण रोजगार के लिये आवेदन करता है और उसे पन्द्रह दिन के अंदर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता है तो वह ग्रामीण बेरोजगारी भत्ते को पाने का हकदार हो जायेगा। पहले ऐसे ग्रामीण को प्रथम माह के लिये मनरेगा मजदूरी दर के एक चौथाई के बराबर राशि का भुगतान किया जायेगा तथा उसके बाद शेष दो माहों के लिये मनरेगा मजदूरी के आधे के बराबर राशि का भुगतान किया जायेगा। यह भत्ता राज्य रोजगार गारंटी परिषद सात दिन के अंदर भुगतान करेगा। उल्लेखनीय है कि मनरेगा मजदूरी की दर हर साल रिवाईज होती है। वर्तमान में यह दर 193 रुपये प्रतिदिन है तथा इस साल 31 मार्च के पहले इस दर में मंहगाई की दर के अनुसार बढ़ौत्तरी की जायेगी।