ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले में जिला अदालत ने आज अहम फैसला सुनाया है। दोनों पक्षों की मांगों को सुनने के बाद जिला अदालत ने ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।

वाराणसी के सत्र न्यायालय के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया था। इसी बीच, हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी में एक शिवलिंग मिलने का दावा किया था। जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया। हिंदू पक्ष ने इस कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। जिसके तहत अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में मिले इस कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग नहीं की जाएगी। 

जिला न्यायाधीश ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस फैसले को हिंदू पक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिस स्थान पर कथित शिवलिंग मिला है उसे सुरक्षित रखा जाए। ऐसे में कार्बन डेटिंग के दौरान अगर उक्त शिवलिंग क्षतिग्रस्त हो जाता है तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। जिससे आम लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो सकती हैं।

इससे पहले, वाराणसी की एक अदालत ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 को दरकिनार करते हुए कोर्ट ने श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले को सुनवाई के लिए उपयुक्त घोषित किया था। तभी से मामले की सुनवाई चल रही है। इस बीच, हिंदू पक्ष की 4 महिला शिकायतकर्ताओं ने कार्बन डेटिंग की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया। कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। यद्यपि, श्रृंगार गौरी में पूजा की अनुमति के लिए दायर मामले की सुनवाई जारी रहेगी।