भोपाल। राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले लोक अभियोजन संचालनालय के डायरेक्टर अन्वेष मंगलम ने पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी का पत्र लिख कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के अंर्तगत सजा का प्रतिशत बढ़ाने के लिये केसों में वीडियोग्राफी किये जाने का आग्रह किया है। इस संबंध में राज्य के विधि विभाग ने भी प्रावधान किया हुआ है।
पत्र में कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के प्रकरणों में सजायाबी प्रतिशत बढ़ाने की मंशा से अधिनियम की धारा 15 के तहत प्रत्येक जिले में पदस्थ सभी उपसंचालक अभियोजन, जिला लोक अभियोजन अधिकारी/अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी एवं समस्त सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी की सेवा अवधि 7 वर्ष होने पर विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है।
अधिनियम के अतंर्गत प्रकरणों में सजा न हो पाने के कारकों के विश्लेषण उपरांत इन कारकों को दूर करने का एक प्रमुख उपाय है कि अजाजजा अत्याचार अधिनियम के अधीन अपराधों से सबंधित सभी कार्यवाहियों की वीडियोग्राफी की जाये।
पत्र में कहा गया है कि सभी अनुसंधान कार्यवाहियों की वीडियोग्राफी आवश्यक रूप से कराई जावे। सभी अनुसंधान कार्यवाहियों की वीडियोग्राफी (पीडि़त/साक्षियों के कथन, जप्ती, गिरफ्तारी आदि कार्यवाही) को अभियोग पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाये। अनुसंधान कार्यवाहियों की वीडियोग्राफी के सबंध में डिजिटल साक्ष्य को प्रमाणित करने की विधिक अपेक्षाओं की पूर्ति विवेचक/थाना प्रभारी द्वारा आवश्यक रूप से कराई जाकर प्रमाण पत्र, अभियोग पत्र (चालान) के साथ न्यायालय में पेश किया जाये। सबंधित विशेष लोक अभियोजकों को केस डायरी/चालान के साथ वीडियोग्राफी की प्रति उपलब्ध कराया जाना उचित होगा जिससे वह न्यायालय के समक्ष उचित रूप से प्रकरण को रख सकें।