शक्ति ही शुभ और शांति का आधार है। हम नारी को जगतजननी मानते हैं, लेकिन उन्हें पूजाघर में बंद कर देते हैं ये ठीक नहीं है। मातृशक्ति के जागरण का कार्यक्रम अपने परिवार से प्रारंभ करना होगा और फैसला लेने में महिलाओं को भी शामिल करना होगा।   

यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के मौके पर नागपुर में संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि संघ में शस्त्र पूजन की परंपरा है। इस परंपरा को आज नागपुर में निभाया जा रहा है। कार्यक्रम में पर्वतारोही और हिमालय की चोटी पर पहुंचने वाली पद्मश्री संतोष यादव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। 

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। हमने लंका को उसके आर्थिक संकट में मदद की।  यूक्रेन में अमेरिका और रूस की लड़ाई में हमने अपने हित को सबसे आगे रखा। मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हम लगातार सफल होते जा रहे हैं और स्वावलंबी होते जा रहे हैं। इस नवोत्थान की आहट सुनकर हम भी प्रसन्न हो रहे हैं। 
  
मोहन भागवत ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में स्वार्थ और द्वेष के आधार पर दूरियां और दुश्मनी बनाने का काम स्वतन्त्र भारत में भी चल रहा है। उनके बहकावे में न फंसते हुए,उनकी भाषा, पंथ, प्रांत, नीति कोई भी हो, उनके प्रति निमोर्ही होकर निर्भयतापूर्वक उनका निषेध करना चाहिए। 

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद हैं। नागपुर में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने विजयादशमी उत्सव के मौके पर पथसंचलन किया। डॉ हेडगेवार स्मृति मंदिर रेशमीबाग से यह पथसंचलन शुरू हुआ और शहर के अन्य मार्ग से होता हुआ वापस रेशमीबाग पहुंचा।