भोपाल, 

भोपाल स्मार्ट सिटी को गुजरात में क्लीन एनर्जी अवॉर्ड दिया गया है। इसकी मुख्य वजह स्मार्ट सिटी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों से बिजली उत्पादन किया जाना है। इसके लिए बड़े तालाब के रिटेनिंग वाल पर डेढ़ किलोमीटर में 500 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। जिनसे रोजाना पांच हजार यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल वीआईपी रोड पर स्थित स्ट्रीट लाइट व कर्बला पंप हाउस के लिए किया जाता है।

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स्मार्ट सिटी के सीईओ अंकित अस्थाना ने बताया कि नगर निगम व स्मार्ट सिटी के सामूहिक प्रयास से बड़े तालाब के किनारे सोलर पैनल लगाए गए हैं। इसको लगाने में करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे बड़े तालाब में स्थित कर्बला पेट्रोल पंप को संचालित करने में किया जा रहा है। इससे करीब निगम को हर महीने चार लाख रुपए की बचत हो रही है। इस पंप हाउस से पुराने भोपाल के ईदगाह हिल्स, शाहजहांनाबाद, हमीदिया रायल मार्केट, काजी कैंप, भोपाल टॉकीज, बाल बिहार, घोड़ा नक्कास,बैरागढ़ समेत अन्य इलाकों में साढ़े तीन लाख आबादी को पानी सप्लाई किया जाता है। इसके साथ ही बची हुई बिजली का इस्तेमाल वीआईपी रोड और लेकव्यू में लगाई गई स्ट्रीट लाइटों को रोशन करने में किया जाता है।

सब्जियों के कचरे से रोशन बाजार स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा सब्जियों से निकलने वाले कचरे से बायो मेथेनाइल गैस बनाने का नवाचार किया गया है। इसके तहत बिट्टन मार्केट सब्जी मंडी में पांच किलोवाट क्षमता का प्लांट लगाया गया है। इसके लिए रोजाना पांच टन कचरे की आवश्यकता पड़ती है। जो कचरा सब्जी मंडी और होटलों से निकलता है, उसी का इस्तेमाल इस बायो मेथेनाइल प्लांट में किया जाता है। इससे 500 यूनिट बिजली रोजाना उत्पादित की जा रही है। इस बिजली का इस्तेमाल बाजार में लगी स्ट्रीट लाइट व अन्य विद्युत उपकरणों के लिए होता है। जिससे करीब एक लाख रुपये के बिजली की हर महीने बचत होती है।