भोपाल: राज्य के जल संसाधन विभाग ने अपने सोलह रेस्ट हाऊसों को पर्यटन विभाग को कुछ शर्तों के साथ सौंप दिये हैं। अब पर्यटन विभाग इनका उपयोग आम पर्यटकों को निर्धारित दरों पर ठहराने में कर सकेगा। इनका उपयोग मोटल एवं रिसोर्ट बनाने में भी हो सकेगा।
ये हैं सोलह रेस्ट हाऊस:
एक- लखुन्दर परियोजना ग्राम पाल्सावाद सोना जिला शाजापुर। दो- टिल्लर जलाशय परियोजना ग्राम-पचेटी (आग के पास)। तीन- काजीखेड़ी तालाब (महिदपुर) रेस्ट हाऊस ग्राम-काजीखेड़ी। चार- अर्निया बहादुर तालाब पंचायत झारडा जिला उज्जैन। पांच- ढबला रहबारी रेस्ट हाऊस साहेबखेडी तालाब जिला उज्जैन। छह- सरोज सरोबर (धेलाबाड़) रेस्ट हाऊस डैम ग्राम-देवरूंडी। सात- सेंगवाल तालाब रेस्ट हाऊस (डीकरी) जिला बड़वानी। आठ- यशवंत नगर रेस्ट हाऊस (जानापाव कुटी) यशवंत नगर (महू)। नौ- चंद्रकेशर रेस्ट हाऊस ग्राम हासाखेड़ी तहसील सतवास (खाटापोड़ी) जिला देवास। दस- कन्हरगांव रेस्ट हाऊस ग्राम बहेडिया माल जिला छिंदवाड़ा। ग्यारह- खितौली रेस्ट हाऊस ग्राम खितौली जिला कटनी। बारह- ककेटो रेस्ट हाऊस ग्राम ककेटो जिला ग्वालियर। तेरह- गोपालदास रेस्ट हाऊस ग्राम पडऱा जिला सीधी। चौदह- बर्घरू रेस्ट हाऊस ग्राम त्योंदा जिला विदिशा। पन्द्रह- दहोद रेस्ट हाऊस ग्राम दाहोद जिला रायसेन। सोलह- संजय सागर रेस्ट हाऊस ग्राम नेहरयाई जिला विदिशा।
ये रखी हैं शर्तें:
एक, हस्तांतरित किये जा रहे सभी 16 विश्राम गृहों एवं भूमि पर जल संसाधन विभाग का स्वामित्व रहेगा। दो, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को ठहरने हेतु कक्ष उपलब्ध कराने में प्राथमिकता देनी होगी। तीन, निर्मित भवन तथा उससे सम्बद्ध अन्य संरचनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की होगी तथा सम्पति किसी प्रकार की क्षति होने पर प्रतिपूर्ति पर्यटन विभाग द्वारा की जायेगी।
चार, यह सुनिश्चित करना पर्यटन विभाग की जवाबदारी होगी कि बांध एवं अन्य निर्मित संरचनाओं को किसी प्रकार से क्षति न पहुंचेे एवं प्रभावित न हो। पांच, आने-जाने वाले पर्यटकों के जान माल एवं किसी भी प्रकार की जवाबदारी पर्यटन विभाग की होगी। छह, हस्तांतरित किये जाने वाले विश्राम ग्रहों के समीप स्थित जलाशयों में किसी भी प्रकार की गतिविधियां प्रतिबंधित होगी।
बांध में किसी प्रकार की गतिविधि संचालित करने के पूर्व विभाग से पृथक से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा। सात, बांध के बण्ड पर वाहनों का आवगमन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। आठ, रेस्ट हाऊस वन भूमि में स्थित होने की स्थिति में अनापत्ति प्रमाण पत्र वन विभाग से प्राप्त करना आवश्यक होगा।
कोलार एवं केरवा डेम रेस्ट हाऊस नहीं देंगे :
जल संसाधन विभाग ने राजधानी भोपाल के निकट केरवा एवं कोलार डेम के पास स्थित अपने विश्राम गृह पर्यटन विभाग को देने से इंकार कर दिया है। ऐसा इसलिये किया है क्योंकि इन दोनों विश्राम गृहों का उपयोग मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के सदस्य करते हैं।