मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव जीत गए हैं। लेकिन उनके चुनावी रण में एक मौका वो भी आया था जब खड़गे को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा पड़ा था। खड़गे कांग्रेस के सबसे सीनियर नेताओं में से एक हैं। साल 2014 के आम चुनाव के बाद गुलबर्गा से दूसरी बार जीते खड़गे को पार्टी ने लोकसभा में अपना नेता चुना था। 

मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र 80 साल है और कई दशकों से वो सक्रिय राजनीति में हैं। खड़गे को गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। खड़गे कर्नाटक के बीदर से आते हैं। उन्होंने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की है और पेशे से वकील भी रह चुके हैं। खड़गे सबसे पहले 1969 में कर्नाटक के गुलबर्ग सिटी कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 1972 में पहली बार चुनकर विधानसभा गए। 

तब से लेकर 2009 तक वो कुल 9 बार विधायक रहे हैं। 1976 में वो पहली बार कर्नाटक में कैबिनेट मंत्री बने। खड़गे को 1988 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2005 में वो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। इसके बाद वो तमाम बड़े पदों पर रहे। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में में गुलबर्गा से उन्हें पहली बार हार मिली। खड़गे को तब BJP के उमेश जाधव ने 95,452 वोटों से हराया था।

गांधी परिवार के भरोसेमंद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन 30 सितंबर को वाइल्ड कार्ड एंट्री मारी थी। मजदूर आंदोलन से अपना करियर शुरू करने वाले खडगे अब देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की बागडोर संभालेंगे। बाबू जगजीवन राम के बाद खड़गे दूसरे दलित कांग्रेस अध्यक्ष हैं। जगजीवन राम 1970-71 में कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे।