3 दिसंबर 1971 से शुरू हुए 13 दिनों तक चले युद्ध में भारतीय सेना के बहादुरी और शौर्य के सामने पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए थे। 16 दिसंबर 1971 को शाम 4.35 बजे पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी ने 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी किए।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का ये सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था। इसके साथ ही दुनिया के मानचित्र पर एक नए देश बांग्लादेश का उदय हुआ था। 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत की विजय और बांग्लादेश के निर्माण ने पूरी दुनिया में जहां भारत के मान और शान को बढ़ाया।
भारत ने यह भी दिखा दिया कि मानवता की रक्षा और अपनी सुरक्षा के लिए वह पूरी तरह से सक्षम और समर्थ है। 1971 में बांग्लादेश का जन्म दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक थी। भारतीय सैनिकों ने जिस साहस से सिर्फ तेरह दिन में पाकिस्तान को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था, वह दृश्य याद करके आज भी रोम-रोम पुलकित हो जाता है।
इसी दिन 16 दिसंबर सारे देश में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। परंतु अफसोस अपनी कुर्बानियां देकर हमारे वीर सैनिकों ने जो युद्ध में जीता था, उसे उस वक्त के हमारे नेताओं ने पाकिस्तान के साथ चर्चा की टेबल पर गवां दिया। हमारे पास उस वक्त 93 हजार पाकिस्तानी युद्ध बंदी थे।
हम चाहते तो इनकी मुक्ति के बदले पाकिस्तान के साथ पाकिस्तान के जबरन कब्जे वाले कश्मीर का सौदा कर सकते थे परंतु कतिपय अनजान कारणों से हमारी उस वक्त की प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने उनको यूं ही छोड़ दिया । यह देश के लिए एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक भूल साबित हुई। "जय हिंद.. जय भारत"