छत्तीसगढ़ में बिलासपुर हाईकोर्ट ने तलाक की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक गंभीर टिप्पणी में कहा है कि पति पत्नी के बीच सेक्स स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी है। इसी के साथ कोर्ट ने तलाक की याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने कहा है कि विवाह के बाद पति या पत्नी, किसी तरफ से शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना क्रूरता है।
बताया जाता है कि बिलासपुर निवासी एक युवक की शादी बेमेतरा की महिला से हुई थी। विवाह के कुछ दिनों बाद पत्नी ससुराल से मायके चली गई। वह हमेशा ऐसा करने लगी। पति के अनुसार करीब चार सालों तक लगातार वह पर्व त्योहार पर अपने मायके चली जाती थी। इसके बाद पति ने तलाक की डिग्री से माध्यम से पांच साल पहले विवाह को भंग करने की मांग को लेकर फैमिली कोर्ट का रूख किया।
इसमें कहा गया कि विवाह के कुछ दिनों बाद से ही प्रतिवादी का आचरण अपीलकर्ता के साथ क्रूरता जैसा था। प्रतिवादी यह किया और उसे वापस आने के लिए कहा मगर वह कहकर प्रताड़ित करती थी कि उसका शरीर भारी है अपने पति को बेमेतरा स्थित मायके में आकर बसने और वह सुंदर नहीं है। चारसाल तक नहीं लौटी के लिए कहती रही। फिरपत्नी ने पति को बिना अपीलकर्ता के पिता की मौत के बाद महिला बताए नौकरी शुरू कर ली जबकि विवाह के समय अपने माता पिता के घर वापस चली गई और चार से यह साफ कर दिया गया था कि प्रतिवादी कोई साल तक मायके रही। अपीलकर्ता ने कई बार संपर्क नौकरी नहीं करेगी।
कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस पी. सैम कोशी और पार्थ प्रतिम साहू की बेंच ने कहा कि यह साफ है कि अगस्त २०१० से पति पत्नी के रूप में दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है, जो यह निष्कर्ष • निकालने के लिए पर्याप्त है कि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं है। पति पत्नी के बीच शारीरिक संबंध विवाहित जीवन के स्वस्थ रहने के लिए महत्वपूर्ण है। पति या पत्नी के साथ शारीरिक संबंध से इनकार करना क्रूरता के बराबर है। प्रतिवादी पत्नी ने अपीलकर्ता के साथ क्रूरता का व्यवहार किया है।