प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने आज अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि वह अभी कोई राजनीतिक दल नहीं बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के 30 साल के शासन के बाद भी बिहार सबसे पिछड़ा राज्य हैं। बिहार को आगे बढाना है तो सबको साथ आना होगा।
My quest to be a meaningful participant in democracy & help shape pro-people policy led to a 10yr rollercoaster ride!
— Prashant Kishor (@PrashantKishor) May 2, 2022
As I turn the page, time to go to the Real Masters, THE PEOPLE,to better understand the issues & the path to “जन सुराज”-Peoples Good Governance
शुरुआत #बिहार से
प्रेस वार्ता लाइव-
PK का विजन-
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा, मेरे पास जो कुछ भी है, आज मैं उसे पूरी तरह बिहार को समर्पित करता हूं। आइए बिहार के लोगों से मिलें, उनकी बात समझें और उन्हें जनसुराज के विजन से जोड़ें। अगले चार महीनों में मैं बिहार में रुचि रखने वाले हजारों लोगों से मिलूंगा। यदि बड़ी संख्या में लोग अभियान में शामिल हों और इस बात पर सहमत हों कि राज्य की दिशा और स्थिति को बदलने के लिए एक नए राजनीतिक दल की आवश्यकता है, तो इसका प्रयास किया जाएगा।
दौरे के बाद की घोषणा-
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से प्रशांत किशोर ने बिहार को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए अपने योगदान के बारे में बताया। उन्होंने घोषणा की कि वह 2 अक्टूबर से पश्चिम चंपारण के गांधी आश्रम से 3,000 किलोमीटर की 'पदयात्रा' शुरू करेंगे। उन्होंने कहा, आइए बिहार के लोगों से मिलें, उनकी बात समझें और उन्हें जनसुराज के विजन से जोड़ें।
प्रशांत किशोर राजनीति में आयेंगे या नहीं..! इस सवाल पर सीएम नीतीश कुमार ने चुप्पी साधे रखी और कहा कि इन सभी मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं हैं। प्रशांत किशोर के अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की अटकलों को लेकर बिहार के राजनीतिक दलों में उथल-पुथल मची हुई हैं। हालांकि सभी राजनीतिक दलों का कहना है कि प्रशांत किशोर राजनीतिक दल बनाने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन बिहार की राजनीति में उनका भविष्य क्या होगा, इस पर सभी दलों के अपने-अपने अलग विचार हैं।
कौन हैं प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को सत्ता में लाने के लिए सुर्खियों में आए थे। उन्हें एक बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार के रूप में जाना जाता हैं। वे अपनी चुनावी रणनीति को अंजाम देने के लिए हमेशा पर्दे के पीछे रहे हैं। प्रशांत किशोर 34 साल की उम्र में UN छोड़कर 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में शामिल हुए थे।
PK को मोदी के उन्नत मार्केटिंग और विज्ञापन अभियानों जैसे चाय पे डिबेट, 3डी रैली, रन फॉर यूनिटी, मंथन का श्रेय दिया जाता है। वह इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) नामक एक संगठन चलाते हैं। आपको बता दें कि यह संगठन नेतृत्व, राजनीतिक रणनीति, संदेश अभियान और भाषणों की ब्रांडिंग करता है।