भोपाल। तीस सेंटीमीटर तक की आरा मशीनें रखने वाले लकड़ी उद्योगों को अब वन विभाग से लायसेंस लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके लिये राज्य सरकार ने सैंतीस साल पहले बनाये मप्र काष्ठ चिरान विनियमन एक्ट 1984 में बदलाव संबंधी संशोधित एक्ट लागू कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि उक्त एक्ट वन क्षेत्रों एवं उसके आसपास लगी आरा मशीनों को नियंत्रित करने के लिये लाया था। इस एक्ट के तहत अब नई आरा मशीनों के लिये लायसेंस देना बंद कर दिये गये थे। पहले से संचालित 2940 आरा मशीनों को जरुर वन विभाग द्वारा लायसेंस नवीनीकृत किया जा रहा है।

लेकिन वन क्षेत्रों से बाहर लकड़ी उद्योगों को प्रोत्साहित करने एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये अब राज्य सरकार ने नया बदलाव ला दिया है जिसमें तीस सेंटीमीटर व्यास तक की आरा मशीनों को लगाकर लकड़ी काटकर उसका फ्रेब्रिकेशन करने वाले उद्योगों को अब वन विभाग से लायसेंस लेने की जरुरत नहीं होगी।

उक्त लकड़ी उद्योग वे हो सकेंगे जो घरेलू मूल के गोल लट्ठों का उपयोग नहीं करते हैं तथा ऐसे उद्योग चीरी हुई इमारती लकड़ी, बेंत, बांस, नरकट, प्लायवुड, विनियर या आयोतित लकड़ी का उपयोग कर सकेंगे तथा ब्लॉक बोर्ड, मीडियम डेनसिटी फाईबर बोर्ड या इसी प्रकार के काष्ठ आधारित उत्पाद प्रोड्यूस कर सकेंगे। दरअसल केंद्र सरकार ने भी इस संबंध में अपना संकल्प जारी किया हुआ है जिसमें छोटे शिल्पियों को जो काष्ठ आधारित उत्पादों की फिनिशिंग एवं फैशनिंग में तीस सेंटीमीटर तक के कटर उपयोग करते हैं, को राहत प्रदान की गई है ताकि काष्ठ आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सके।

यह रहेगी शर्त :
नये बदलाव में कहा गया है कि तीस सेंटीमीटर वाली आरा मशीनों वाले उद्योग गैर वन क्षेत्रों में नियत परिसरों जैसे औद्योगिक केंद्रों की भूमियों, पर ही लग सकेंगे तथा इन्हें एक प्रोफार्मा भरकर वन विभाग को ऑनलाईन जमा करते रहना होगा कि उनके पास कहां-कहां से लकड़ी आई। वन विभाग ऐसे लकड़ी उद्योगों के अभिलेख भी संधारित करेगा।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार की मंशा अनुसार, गैर वन क्षेत्रों में लकड़ी उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये नया संशोधित एक्ट लागू किया गया है जिसके नियम जारी किये जायेंगे। अगर इन लकड़ी उद्योगों ने अपने धन्धे में बिना अनुमति के वन क्षेत्रों की लकड़ी का उपयोग किया और ऐसे प्रकरण बढ़ेंगे तो हम जंगलों की सुरक्षा के लिये इस संशोधित एक्ट को वापस लेने का राज्य सरकार से आग्रह करेंगे।