भोपाल: बांधवगढ़ नेशनल पार्क में वाहनों को पकड़ने और छोड़ने का खेल लंबे समय से चल रहा है. इस खेल को तत्कालीन उप मंडल अधिकारी मानपुर एवं आईएफएस श्रद्धा पेंद्रे ने उजागर किया है. डीएफओ पेंद्रे ने दस्तावेज सहित पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ और विजिलेंस शाखा को की है. शिकायत में छोटे वन कर्मचारियों को न बोलने के लिए धमकाया जा रहा है. शिकायत के बाद बांधवगढ़ प्रबंधन ने रेंजर विजय ज्योतिषी की अध्यक्षता में 2 सदस्य कमेटी गठित की है. कमेटी एक-दो दिन में रहकर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी.
डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे ने शिकायत करने से पहले बांधवगढ़ नेशनल पार्क के मानपुर बफर जोन में उप वन संरक्षक के पद पर कार्य कर चुकी हैं. वहां पदस्थ ही के दौरान ही मानपुर बफर जोन के रेंजर मुकेश अहिरवार और उनके सहायकों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा पार्क प्रबंधन से की थी. जब मुकेश अहिरवार के खिलाफ पर प्रबंधन द्वारा कार्रवाई नहीं की तब उन्होंने अपनी शिकायत प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी जेएस चौहान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शिकायत एवं सतर्कता समिता राजौरा से की है. शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मुकेश अहिरवार ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहन पकाते हैं और बाद में सांठगांठ करके उन्हें छोड़ दिया जाता है. जबकि नियम यह है कि 24 घंटे के भीतर सक्षम प्राधिकारी अधिकारी के माध्यम से न्यायालय भेजी जाए. महिला आईपीएस अधिकारी अपनी शिकायत में सात वाहनों का ब्यौरा और उससे संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए हैं.
कमेटी ने अभी नहीं सौंपी रिपोर्ट :
वरिष्ठ अधिकारियों को की गई शिकायत के बाद पाठ प्रबंधन ने रेंजर विजय ज्योतिषी की अध्यक्षता में 2 सदस्य कमेटी गठित की है. कमेटी ने जप्त वाहनों का भौतिक सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है. कमेटी के अध्यक्ष रेंजर ज्योतिषी ने बताया कि हम जप्त वाहनों के नंबर और उनके चेसिस नंबर जांच कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं.
लीपा-पोती की आशंका :
मैदानी सूत्रों के अनुसार शिकायत होने के बाद प्रबंधन ने छोड़े गए वाहनों को पुनः जब्ती बनाई. बताया जा रहा है कि रेंजर को बचाने के लिए पूरे प्रकरण में लीपापोती की जा रही है. रेंजर पर रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन कराने का भी आरोप है. इन आरोपों पर अभी तक जांच नहीं की गई है.