महाराष्ट्र के बागी विधायक फिलहाल असम में रह रहे हैं। यहां उनका निवास गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल है। ये बागी विधायक इस बड़े होटल में ठहरने के लिए कितना पैसा खर्च कर रहे हैं। इसपर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। पता चला है कि होटल में सात दिनों के लिए कुल 56 लाख रुपये की लागत से कमरे बुक किए गए हैं।

एकनाथ शिंदे के लिए गुवाहाटी के रैडिसन ब्लू होटल में कुल 70 कमरे बुक किए गए हैं। इन कमरों को कुल सात दिनों के लिए बुक किया गया है। इसके अलावा रोजाना 8 लाख रुपए खाने और अन्य सेवाओं पर खर्च किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यहां पर बुकिंग और खाने-पीने के खर्च पर करीब 1.12 करोड़ रुपये ख़र्च किये गए।

एकनाथ शिंदे पर निशाना-

गुवाहाटी के रैडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे के साथ विधायकों की सही संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है। शिंदे खेमे में दो निर्दलीय विधायक हाल ही में शामिल हुए हैं। इस तरह एकनाथ शिंदे को शिवसेना के 37 समेत करीब 46 विधायकों का समर्थन मिला हैं।

अब खबर आ रही है कि तीन विधायक और जल्द शामिल होंगे। सूत्रों ने बताया कि होटल में विधायकों के साथ कुछ सांसदों और नेताओं के परिवार भी मौजूद है। बता दें कि उद्धव सरकार ने कल सुबह थोड़ी विनम्रता दिखाई और विधायकों को महाराष्ट्र लौटने को कहा। संजय राउत ने तो यहां तक ​​कह दिया कि अगर पार्टी के विधायक एमवीए से अलग होना चाहते हैं तो ऐसा ही होगा, लेकिन विधायकों को मुंबई आकर सीएम उद्धव से बात करनी होगी। लेकिन अब उद्धव के तेवर भी गर्म नज़र आ रहें है।

12 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग-

उद्धव की तरफ़ से डिप्टी स्पीकर को पत्र लिखा गया। शिंदे सहित कुल 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई। इसके बाद शिंदे का गुट भी सक्रिय हो गया। शिंदे के गुट ने दावा किया कि विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे हैं। क्योंकि उनके पास शिवसेना के 37 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है।

इसके बाद शरद पवार का एक बयान भी सामने आया। शरद पवार ने बागी विधायकों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। पवार ने यह भी बताया कि एमवीए सरकार को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस बीच संजय राउत आज पवार से मिलने जाएंगे।

लेकिन इन सबके बीच शिंदे ने कहा, उनके पास बहुमत है। उद्धव केवल उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि कागजों पर संख्या ज्यादा हो सकती है, लेकिन अब यह लड़ाई कानूनी लड़ाई होगी। अगर ज़रूरत पड़ी तो हम सड़क पर भी उतरेंगे।