शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए प्रचार भले ही शुरू कर दिया हो, लेकिन पार्टी में उन्हें अभी भी खड़गे के खिलाफ बराबरी का मौका नहीं मिल रहा है। थरूर ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपना दर्द बयान किया।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या आपको चुनाव में बराबरी का अधिकार मिल रहा है या आपको उनसे कोई शिकायत है? इस पर तिरुवनंतपुरम से पार्टी के सांसद ने कुछ ऐसे उदाहरण दिए, जिसने कांग्रेस के चुनाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
थरूर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "हमारी पार्टी ने 22 साल से चुनाव नहीं कराया है, इसलिए ये गलतियां हुई हैं। मैं मिस्त्री साहब से सवाल नहीं कर रहा हूं। वह स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम उनके खिलाफ शिकायत नहीं कर रहे हैं।" लेकिन, "सिस्टम में कुछ खामियां ज़रूर हैं।
उन्होंने कहा हमारे पास तो सही फोन नंबर भी नहीं है। इसके लिए पहले हमें 30 तारीख को एक लिस्ट दी गई थी। फिर एक हफ्ते बाद हमें दूसरी लिस्ट मिली। उसमें भी फ़ोन नंबर गलत थे कुछ के तो उनके पास पते भी नहीं थे। तो हम किसी से कैसे संपर्क करें? दूसरी लिस्ट में मिले नाम और फोन नंबर पहली लिस्ट से अलग थे। इसलिए मुझे शिकायत नहीं है कि वे ऐसा जानबूझ कर कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "17 तारीख आते-आते तक, इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि हम अपना संदेश कार्यकर्ताओं तक पहुंचा भी पाएंगे या नहीं। क्योंकि अगर उनके फोन नंबर गलत हैं, तो हम उन्हें कॉल या मैसेज नहीं कर सकेंगे। हमने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। आपसे बात करने के बाद मैं उम्मीद करता हूं, कि मुझे कुछ प्रतिनिधि जिनसे मैं सीधे संवाद नहीं कर सकता, आपके माध्यम से उन्हें पता चल जाएगा।
दूसरी बात ये है कि कुछ नेताओं ने कुछ इस तरह का काम किया है, जिससे मुझे एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के न हो पाने का अंदेशा लगता है। कई जगहों पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और शीर्ष नेता खडगे साहब का स्वागत करते हैं, उनके साथ बैठते हैं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लोगों का परिचय कराते हैं। PCC की ओर से निर्देश दिया जाता है कि आओ खडगे साहब आ रहे हैं। PCC में इस तरह के कई मौके सामने आए, लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ।
मैं कई बार PCC गया हूं, लेकिन समिति के अध्यक्ष वहां से नदारद थे। लेकिन फिर भी मैं कार्यकर्ताओं से खुशी-खुशी मिलता हूं। मैं जानता हूं कि एक आम कार्यकर्ता का वोट और एक बड़े नेता का वोट एक समान होता है। इसलिए मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर हम एक समान प्रतिस्पर्धा की बात करें तो इस तरह के व्यवहार और हालातों से ये स्पष्ट हो जाता है कि स्थिति क्या है।