एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन वाले बयान का जवाब दिया है। हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों की आबादी नहीं बढ़ रही है, क्योंकि ज्यादातर कंडोम का इस्तेमाल मुसलमान कर रहे हैं। इसलिए मोहन भागवत को आंकड़े सामने रखकर बात करनी चाहिए।
मोहन भागवत ने क्या कहा था?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार (5 अक्टूबर) को दशहरे के मौके पर कहा था कि देश को व्यापक जनसंख्या नीति की जरूरत है। धर्म के आधार पर जनसंख्या असंतुलन से देश बुरी तरह प्रभावित हुआ था। उन्होंने 1947 के विभाजन और पाकिस्तान के उदय के लिए कथित धार्मिक जनसंख्या असंतुलन को जिम्मेदार ठहराया था।
मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी का जवाब-
ओवैसी ने संघ प्रमुख के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि मोहन भागवत कहते हैं कि भारत में एक धार्मिक असंतुलन है और अब जनसंख्या पर विचार करना होगा। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) दो प्रतिशत है। देश में सबसे ज्यादा टीएफआर मुसलमानों का गिरा है। मैं भागवत से पूछना चाहता हूं कि 2000 से 2019 तक अब तक 90 लाख हिंदू महिलाओं के बच्चे लापता हो चुके हैं, अंग्रेजी में इसे कन्या भ्रूण हत्या कहा जाता है। भागवत इस पर क्यों नहीं बोलते?
ओवैसी ने आगे कहा कि कुरान में बेटियों की हत्या को सबसे बड़ा अपराध माना गया है। अगर मुसलमान 1000 लड़के पैदा करते हैं तो 943 बेटियां पैदा होती हैं जबकि हिंदू भाई 1000 बेटे पैदा करते हैं तो 913 बेटियां पैदा होती हैं। भागवत इस आंकड़े के बारे में बात क्यों नहीं करते? ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों की आबादी नहीं बढ़ रही है। इस बात पर जोर न दें कि जनसंख्या बढ़ रही है। हमारी आबादी घट रही है।
इस मुद्दे पर ओवैसी लगातार हमलावर हो रहे हैं। उन्होंने बुधवार को आरएसएस प्रमुख के इस बयान पर ट्वीट भी किया था। उन्होंने लिखा था कि यदि हिंदुओं और मुसलमानों का "एक ही डीएनए" है, तो "असंतुलन" कहाँ है? जनसंख्या नियंत्रण की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमने पहले ही प्रतिस्थापन दर हासिल कर ली है। चिंता बढ़ती उम्र और बेरोजगार युवाओं की है। मुसलमानों में प्रजनन दर में सबसे तेज गिरावट आई हैं।