मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नीति आयोग द्वारा इनोवेटिव एग्रीकल्चर पर 25 अप्रैल को हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में वर्चुअल शामिल हुए। उत्तर प्रदेश़, उत्तराखंड़, आंध्रप्रदेश और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी इस कार्यशाला में शामिल हुए। वर्चुअल संबोधन में शिवराज ने कहा, हमारे सतत प्रयास का यह परिणाम रहा कि मध्यप्रदेश ने गेहूं के उत्पादन में पंजाब को भी पीछे छोड़ दिया।
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प्राकृतिक खेती के लिए गंभीरता से करना होगा कार्य-
उन्होंने कहा, 17 लाख हेक्टेयर में अभी भी हमारे यहां जैविक खेती हो रही है। हमारे जनजातीय भाई-बहन आज भी गोबर की खाद का उपयोग करते हैं, रासायनिक खाद का उपयोग इन क्षेत्रों में नहीं होता है।रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग के कारण कई असाध्य बीमारियां हो रही हैं। अब हमें इससे बचना होगा और प्राकृतिक खेती की ओर जाना होगा। यह धरती भावी पीढ़ियों के रहने लायक बचे, हमें इसके लिए गंभीरता से कार्य करना होगा।
प्राकृतिक खेती की देंगे ट्रेनिंग-
शिवराज बोले, स्वाभाविक रूप से मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों में किसान प्राकृतिक खेती करते हैं। मैंने स्वयं भी अपने खेत के कुछ हिस्से में प्राकृतिक खेती करनी शुरू की है। हमने मध्य प्रदेश में प्राकृतिक कृषि के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक कृषि बोर्ड बना दिया है। यह जरूरी है कि यह धरती आगे आने वाली पीढ़ियों के रहने लायक बची रहे इसलिए हमको सोचना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा, हम नर्मदा जी के दोनों तटों पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने का कार्य करेंगे। हर ब्लॉक में हम 5 पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति करेंगे। यह कार्यकर्ता वह पूरे ब्लॉक में प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग देकर किसानों को प्रेरित करने का काम करेंगे और जो किसान प्राकृतिक खेती करेंगे उन्हें गाइड करने का भी काम करेंगे।
प्राकृतिक खेती से ही भविष्य होगा उज्ज्वल-
शिवराज ने कहा, रासायनिक खेती के लिए सरकार सब्सिडी प्रदान करती है, तो प्राकृतिक खेती के लिए भी सब्सिडी प्रदान की जायेगी, ताकि किसान इसे प्रारंभ कर सकें। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।धरती माता को बचाना है, तो केमिकल फर्टिलाइजर से अपनी धरती को हमें बचाना होगा। प्राकृतिक खेती से हमारी धरती बचेगी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी उज्ज्वल होगा।