पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस में एक बार फिर बगावत का सुर तेज हो गया है। कांग्रेस के बागी G23 नेताओं के एक समूह ने बुधवार देर रात दिल्ली में गुलाम नबी आजाद के घर पर मुलाकात की। बैठक के बाद कपिल सिब्बल और शशि थरूर समेत कांग्रेस के 18 नेताओं ने भी बयान जारी किए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी, जब वे गुलाम नबी आजाद के आवास 5 साउथ एवेन्यू पर बैठक से बाहर निकले थे। हालांकि यह मुस्कान कांग्रेस आलाकमान और बागी गुट के बीच बढ़ती कलह को छिपाने के लिए काफी नहीं थी। जानकारी के अनुसार, गुलाम नबी आजाद आज पार्टी के शीर्ष आलाकमान के साथ बातचीत कर सकते हैं।
Congress' G23 leaders suggest adoption of the model of collective and inclusive leadership 'only way forward' for the party
— ANI Digital (@ani_digital) March 16, 2022
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G23 नेताओं ने अपने बयान में क्या कहा ?
बैठक से 5 पूर्व सीएम, 7 पूर्व केंद्रीय मंत्री और कुछ पूर्व सांसद भी आजाद के घर से निकले थे। वे सभी डिनर में शामिल होने आए थे। हालांकि, विवेक तन्खा के अलावा किसी भी नेता ने मीडिया में कोई बयान नहीं दिया है। विवेक तन्खा ने कहा कि यह मुलाकात बगावत के लिए नहीं बल्कि दोस्तों के साथ मामूली डिनर के लिए थी। बैठक के बाद एक संक्षिप्त बयान भी जारी किया गया। बयान में सामूहिक और समावेशी नेतृत्व की बात की गई। साथ ही पार्टी को भाजपा का मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ आने की सलाह दी गई।
Delhi | G23 leaders including Shashi Tharoor, Kapil Sibbal, Mani Shankar Aiyar, Manish Tiwari, and others left from the residence of Ghulam Nabi Azad after the meeting ended. pic.twitter.com/HkCaE5TUTI
— ANI (@ANI) March 16, 2022
बयान से जनता के बीच स्पष्ट संदेश गया कि कांग्रेस में युद्धविराम अब बीते दिनों की बात हो गई है। साथ ही अब बागी नेता सभी पार्टी कार्यकर्ताओं के पास भी जाएंगे। कांग्रेस के बागी गुट की बैठक ऐसे समय हुई है जब सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक पांच राज्यों में हालिया हार के बाद हो रही है। गुलाम नबी आजाद के घर पर हुई बैठक में जी-23 के नेताओं की संख्या में इजाफा देखा गया। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में कांग्रेस के और भी नेता बागी गुट में शामिल हो सकते हैं।
भविष्य की योजना क्या है ?
बैठक के करीबी सूत्रों ने संकेत दिया कि भविष्य की कार्यवाही की घोषणा जल्द ही की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इसका मतलब यह हुआ कि सभी बागी नेता कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के पास जाएंगे और जमीनी स्तर की बैठक करेंगे। बैठक में मौजूद एक कांग्रेस नेता ने कहा, हम पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। हम कांग्रेसी हैं और पार्टी की विचारधारा में विश्वास करते हैं। इसलिए हम पार्टी में तब तक रहेंगे जब तक हमें निष्कासित नहीं किया जाता।
नेताओं ने अपने बयान में कांग्रेस नेतृत्व से 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती देने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन करने की अपील की। इतना ही नहीं, इन नेताओं ने एक बार फिर पार्टी में अधिक समावेश और सामूहिक नेतृत्व की आवश्यकता की बात कही। इससे पहले डिनर पार्टी कपिल सिब्बल के घर पर होनी थी। लेकिन बाकी बागी नेता कपिल सिब्बल के घर यह संकेत देने के लिए नहीं जाना चाहते थे कि वे गांधी परिवार के बारे में उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं। एक अन्य नेता ने कहा, हम बैठक के बारे में छिपाने या माफी मांगने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हमारा मानना है कि पार्टी में बातचीत और नेतृत्व की पसंद की जरूरत है।
बैठक में शामिल हुए थे ये नेता :
गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, अखिलेश प्रताप सिंह, शशि थरूर, एमए खान, संदीप दीक्षित, विवेक तन्खा, आनंद शर्मा, पृथ्वीराज चौहान, भूपिंदर सिंह हुड्डा, राज बब्बर, मणिशंकर अय्यर, पं. शर्मा और परनीत कौर मौजूद थे।
पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं होता :
इस बयान से कांग्रेस के बागी नेताओं के रवैये का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। दरअसल नेताओं ने अपने बयानों में कभी भी गांधी परिवार का जिक्र नहीं किया। साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति की हाल ही में हुई बैठक में उठाए गए कदमों का भी जिक्र नहीं है। कार्यसमिति की बैठक में 5 राज्यों की हार के बाद सोनिया गांधी ने सभी प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफा देने को कहा था। इतना ही नहीं सोनिया गांधी ने हार की समीक्षा के लिए 5 राज्यों में नेताओं को भी तैनात किया है।