नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को असम, मणिपुर और नागालैंड में विवादास्पद सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) पर एक बड़ी घोषणा की है। केंद्र सरकार ने असम, मणिपुर और नागालैंड राज्यों में क्षेत्र को कम करने का फैसला किया है, जो सैन्य अधिनियम AFSPA के तहत आते हैं। इस बात का ऐलान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया।

नागालैंड के मोन जिले में हाल ही में एक पैरा कमांडो ऑपरेशन में गलत पहचान के कारण कई ग्रामीणों की मौत हो गई थी। तब से असम, मणिपुर और नागालैंड में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम, 1958 (AFSPA) को निरस्त करने की मांग की जा रही है।

'AFSPA' का विवाद : 

अशांत क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए AFSPA अधिनियम के तहत सशस्त्र बलों को कुछ अधिकार दिए गए है। यह अधिनियम एक बार नोटिस दिए जाने के बाद कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति पर बल प्रयोग या फायरिंग की अनुमति देता है। हालाकि पहले सशस्त्र बलों को "असीमित" शक्तियां देने पर उनकी आलोचना की गई थी।

यह कानून सशस्त्र बलों को बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने, एक क्षेत्र में प्रवेश करने और तलाशी लेने की अनुमति देता है। जम्मू और कश्मीर के अलावा, विवादास्पद कानून नागालैंड, असम, मणिपुर (इंफाल के सात विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर) और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर लागू होता है। त्रिपुरा और मेघालय के कुछ हिस्सों को सूची से बाहर कर दिया गया है।

केंद्र को 'अशांत क्षेत्र' घोषित करने का अधिकार :

जिन क्षेत्रों में नागरिकों की सहायता के लिए सशस्त्र बलों के उपयोग की आवश्यकता होती है, उन्हें 'अशांत क्षेत्रों' के रूप में चिह्नित किया जाता है। AFSPA अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, किसी भी धार्मिक, जातीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह, जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच मतभेद या विवाद के कारण किसी भी क्षेत्र को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया जा सकता है। राज्यों को शुरू में किसी क्षेत्र को 'अशांत क्षेत्र' घोषित करने का अधिकार था, लेकिन 1972 में इस अधिकार को केंद्र ने अपने हाथ में ले लिया।