राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत चुकीं द्रौपदी मुर्मू की जीत यूं तो तय लग रही थी, लेकिन उनकी जीत के साथ प्रतिद्वंदी यशवंत सिन्हा की हार के भी खूब चर्चा होने लगी है। दरअसल तीन दौर की मतगणना के बाद ही मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार सिन्हा पर निर्णायक बढ़त बना ली,चौथे राउंड में यशवंत सिन्हा के वोटों ने जोर मारा, लेकिन तब तक वे काफी पिछड़ चुके थे।
दरअसल, सिन्हा पहले राउंड में ही रेस से बाहर हो गए थे। आंकड़े भले ही पहले से मुर्मू के पक्ष में थे, लेकिन यशवंत सिन्हा इस तरह से हारेंगे यह किसी ने नहीं सोचा था। यही कारण है कि हार की चर्चा के। चुनाव में मुर्मू को जीत के लिए जरूरी 5 लाख 43 हजार 261 वोट से ज्यादा तीसरे राउंड में ही मिल गए।
तीन राउंड की गिनती पूरी होने के बाद मर्म के खाते में 5 लाख 77 हजार 777 वोट थे। वहीं, यशवंत सिन्हा 2 लाख 61 हजार 62 वोट ही जुटा सके। इसमें राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों समेत 20 राज्यों के वोट शामिल हैं। इसलिए तीन राउंड की गिनती के बाद यशवंत सिन्हा ने भी हार मान ली। उन्होंने मुर्मू को बधाई देते हुए कहा द्रौपदी मुर्मू को उनकी जीत पर बधाई देता हूँ। देश को उम्मीद है कि गणतंत्र के 15वें राष्ट्रपति के रूप में वे बिना किसी भय या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करेंगी।
चौथे राउंड में लौटे थे रेस में
विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा मतगणना के पहले ही राउंड में बाहर हो गए थे। मुर्मू की पहले राउंड में वोट वैल्यू 3,78 लाख थी। जबकि, सिन्हा 1.45 पर टिके थे। इसके बाद तीसरे राउंड तक जीत का अंतर बढ़ता गया। चौथे राउंड में सिन्हा ने वापसी जरूरी की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आंकड़ों के मुताबिक, मुर्मू को 6,76,803 वोट मिले, जबकि सिन्हा को 3,80,177 वोट मिले
क्रॉस वोटिंग ने भी पीछे धकेला
राष्ट्रपति चुनाव में पहले राउंड में सांसदों के वोटों की गिनती की गई। लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसदों के वोट मान्य थे। हालांकि, इनमें 15 मत रह हो गए, जबकि कुछ सांसदों ने वोट नहीं डाले थे। मुर्मू को 540 वोट मिले। वहीं, यशवंत सिन्हा को 208 सांसदों के वोट मिले। यानी संसद में मुर्मू को 72 फीसदी सांसदों का समर्थन हासिल हुआ है, जबकि यशवंत सिन्हा के लिए सिर्फ 28 फीसदी सांसदों ने ही वोट डाला।