भोपाल: छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उईके ने कहा है कि 'पेसा एक्ट' आदिवासी आबादी के शोषण को रोकने के लिए मील का पत्थर साबित होगी. सुश्री उईके ने कहा कि मैं जब-जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलती थी, तब-तब उनसे 'पेसा एक्ट' लागू करने के लिए आग्रह करती थी. सुश्री उईके ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल से आग्रह किया है कि पेसा एक्ट को लेकर आदिवासी ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जाए.
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ की राज्यपाल दो दिवसीय मध्य प्रदेश के दौरे पर भोपाल आईं थी. इस दौरान पेसा एक्ट को लेकर उनसे विस्तार से बातचीत हुई. बातचीत के दौरान राज्यपाल सुश्री उईके ने कहा कि पेसा एक्ट लागू हो जाने से आदिवासी क्षेत्रों की ग्राम सभा अब बहुत अधिक शक्तिशाली हो गई है.
विकास परियोजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के कारण अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों में बड़े पैमाने पर संकट पैदा हो गया था. पेसा एक के नियम लागू होने के बाद आदिवासी क्षेत्रों का विकास होगा. उन्होंने कहा कि यह एक्ट विकास के एक नए प्रतिमान को पेश होगा.
एक सवाल के जवाब में राज्यपाल सुश्री उईके ने बताया कि भारतीय संविधान के 73वें संशोधन में देश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई थी. लेकिन यह महसूस किया गया कि इसके प्रावधानों में अनुसूचित क्षेत्रों विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों की आवश्यकताओं का ध्यान नहीं रखा गया है.
इस कमी को पूरा करने के लिए संविधान के भाग 9 के अन्तर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में विशिष्ट पंचायत व्यवस्था लागू करने के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996 बनाया गया. उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में इसे लागू किया गया था किंतु छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इसके नियम तक नहीं बने थे.
मैं जब-जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करती, तब-तब उनसे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पेसा एक्ट लागू करने और उसके नियम बनाने के लिए आगरा किया करती थी. मेरे बार-बार आग्रह का परिणाम यह रहा कि मध्यप्रदेश में भी पेसा एक्ट लागू करने के नियम बन रहे हैं. चूंकि मैं मध्य प्रदेश मूल की आदिवासी हूं इसलिए यहां के आदिवासियों की विशेष चिंता रहती है.
पट्टे दिए जा रहे हैं पर अधिकार नहीं-
विशेष बातचीत में राज्यपाल सुश्री उईके ने बताया कि वन अधिकार के तहत आदिवासियों के पट्टे तो दिए जा रहे हैं पर अधिकार नहीं मिल रहा है. पेसा एक्ट के तहत उन्हें अधिकार भी मिलेंगे. ट्राईबल जमीन पर माइनिंग किए जा रहे हैं पर उसका लाभ उन्हें नहीं मिलता है.
मेरा कहना यह है कि माइनिंग में आदिवासियों को डायरेक्टर बनाया जाए. ताकि प्रॉफिट में उसकी शेयरिंग भी रहे. इस एक्ट के लागू होने के बाद ग्राम सभा में 50% प्रतिनिधि आदिवासी रहेंगे. ग्राम सभा का अध्यक्ष भी आदिवासी होगा. ग्राम सभा के निर्णय को प्रशासन मानने के लिए बाध्य होगा.
स्पेशल ट्रेनिंग दी जाए-
छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री उईके ने प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात कर आग्रह किया कि आदिवासी ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाए. उन्हें एक और नियम की बारीकी को समझाया जाए कि एक्ट और उसके नियमों को किस तरीके से क्रियान्वयन किया जाए. ग्राम सभा में 10-10 प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि एक्ट के लागू होने से ग्राम सभा की सहमति के बिना विस्थापन नहीं किया जा सकेगा.
क्या है पेसा एक्ट?
पेसा एक्ट यानी पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अधिनियमित के कानून है.
दरअसल अनुसूचित क्षेत्र भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची द्वारा पहचाने गए क्षेत्र हैं. यह अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए विशेष अधिकार देता है. पंचायतों से संबंधित संविधान के भाग 9 के प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिए एक अधिनियम है.