भोपाल: वन भवन में पदस्थ पीसीसीएफ कैंपा और वर्किंग प्लान मनोज अग्रवाल एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार अपने मातहतों की एसीआर (गोपनीय चरित्रवली ) लिखने को लेकर उनकी आलोचना हो रही है। उनके व्यवहार को एक अफसर ने टिप्पणी की छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता... यानि अग्रवाल जी पीसीसीएफ कैंपा और वर्किंग प्लान भले बन गए हैं किन्तु संकीर्ण सोच से ऊपर नहीं उठ पाएं हैं।

पिछले दिनों पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल ने कुछ आईएफएस अफसरों के एसीआर लिखे हैं। इसके अंक जब से सार्वजनिक हुए तब से अफसरों के बीच आलोचना के केंद्र में है। खासकर वर्किंग प्लान लिखने वाले उन 5-6 अफसरों को 10 अंक दिए हैं, जिनके पास सर्किल का प्रभार है और वे अक्सर मुख्यालय में उनकी परिक्रमा करते देखे जा सकते हैं। शेष अधिकारियों को अग्रवाल की कलम से सात अंक से लेकर साढ़े सात अंक दिए हैं। 

खास बात यह रही कि अब तक अधिकांश शीर्ष अधिकारियों की नजरों में नान परफॉरमेंस अफसर रही, उन्हें अग्रवाल की कलम ने 10 अंक दिए। एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि 10 अंक रेयर ही दिए जाते हैं। इसमें भी एसीआर लिखने अफसर को यह लिखना होता है कि 10 अंक, इन - इन कारणों से दिए गए हैं। 

इस मुद्दे पर कुछ अफसर एपीसीसीएफ मोहन मीणा की तरह कैट में चुनौती देने का मन बना रहें हैं। अंकों का बंदरबांट कर अग्रवाल ने अन्य अफसरों को यह संदेश दिया है कि वे जो कहते हैं, वह करके दिखाते भी हैं। यानि अग्रवाल ने पहले ही कुछ अफसरों की एसीआर बिगड़ाने की धमकी दे चुके थे। यही नहीं, वे अपने वीसी में भी फील्ड के अफसरों की सीआर बिगाड़ने की धमकी देते रहें हैं। 

एसीआर को लेकर कैट में मामला लंबित

विभाग में पहली बार किसी अधिकारी की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) का विवाद केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) पहुंच गया है. भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी मोहन मीना ने अपनी एसीआर में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को चुनौती देते हुए कैट जबलपुर में याचिका दायर की है। याचिका में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव समेत एसीआर लिखने वाले सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। मोहन मीना का आरोप है कि बिना उनका पक्ष सुने और बिना उन्हें सूचित किए उनकी एसीआर में नकारात्मक प्रविष्टि कर दी गई, जो नियमों के खिलाफ है।

इनका कहना है

मैं तो बहुत पहले ही यह कहता आ रहा हूं कि एसीआर लिखने वाले कुछ अधिकारी पक्षपाती होते हैं। अपने निजी हितार्थ के आधार पर अंक देते आ रहें हैं। इनमें कुछ अधिकारी जरूर अपवाद स्वरूप हो सकते हैं। 

आज़ाद सिंह डबास, सेवानिवृत एपीसीसीएफ