एग्रीकल्चर के क्षेत्र में करियर। एग्रीकल्चर के क्षेत्र में एजुकेशन।
एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी 900 करोड़ हो जाएगी। इसके लिए मौजूदा समय की तुलना में किसानों को 30 फीसदी अधिक भोजन का उत्पादन करना होगा। संसाधनों को लोगों तक पहुंचाना, अति उत्पादन, जलवायु परिवर्तन और भोजन की बर्बादी रोकने जैसी कई चुनौतियों का सामना इस दौर में करना पड़ेगा। इन सभी समस्याओं का समाधान कृषि अर्थशास्त्र से निकल पाएगा।
यह विशेषज्ञता कम लागत और अधिक फायदे देकर दुनिया को अपने संसाधनों का कुशलतापूर्वक, निरंतर और किफायती उपयोग करने में सक्षम बनाएगी। यह क्षेत्र उन उम्मीदवारों को अवसर देता है जिनकी कृषि और इकोनॉमिक्स दोनों में रुचि है। इस विषय में दुर्लभ संसाधनों का वितरण, कृषि के आर्थिक पहलू, फूड चेन सप्लाई, मार्केटिंग आदि का अध्ययन किया जाता है। कृषि अर्थशास्त्री का मुख्य काम एग्रीकल्चर के सामने आ रही समस्याओं और उनके समाधान तक पहुंचना होता है।
देश के कई संस्थान देते हैं यूजी-पीजी की डिग्री:
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान- नई दिल्ली, आनंद कृषि विश्वविद्यालय- आनंद, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान- करनाल, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय- लुधियाना, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय कोयम्बटूर, जी बी पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय- पंतनगर आदि संस्थानों में से किसी एक से आप अपनी डिग्री ले सकते हैं। कृषि अर्थशास्त्र से आप ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों कर सकते हैं।
एग्रीकल्चर के क्षेत्र में नौकरी के अवसर:
जो छात्र कृषि क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं उनके पास पढ़ने के लिए कई और विकल्प भी मौजूद हैं। जैसे बीएससी-एग्रीकल्चर / बीएससी-एग्रीकल्चर (ऑनर्स) + एग्री बिजनेस मैनेजमेंट। इस कोर्स की अवधि कुल 5 वर्ष की होती है। इसके अलावा छात्र एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में बीटेक, एमटेक आदि कोर्स भी कर सकते हैं। इनके लिए खाद व उर्वरक कंपनियों से लेकर एग्रीकल्चर इक्यूपमेंट इंडस्ट्रीज, एनजीओ, सीड इंडस्ट्रीज आदि में कई मौके हैं।
पढ़ाई के मुख्य क्षेत्रों में माइक्रो इकोनॉमिक्स, मैक्रो इकोनॉमिक्स, एग्रीकल्चर मार्केटिंग, फार्म मैनेजमेंट, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, इकोनॉमिक्स, लीनियर ग्रामिंग, प्रोजेक्ट प्लानिंग, फूड एंड एग्रीकल्चर पॉलिसी आदि शामिल हैं। इन प्रोग्राम्स में फार्म प्रबंधन, उत्पादन, कृषि विपणन, कृषि वित्त, आदि संबंधित नीतियों का अध्ययन करते हैं।