श्रीलंका के आलूविहारे मंदिर में पांच सौ बौद्ध भिक्षुओं ने किया था त्रिपिटका का पाली में अनुवाद...
यह फोटो श्रीलंका के मटाले में पहाड़ी पर स्थित आलूविहारे मंदिर का है। कैंडी से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर का इतिहास तीसरी शताब्दी का है।
यह मंदिर त्रिपिटका (बौद्ध धर्म के दर्शन व सिद्धांत) का पाली भाषा में अनुवाद के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में 500 बौद्ध भिक्षुओं ने ताड़ के पत्तों पर यह अनुवाद किया था।
ये भिक्षु अनुवाद से पहले जोर-जोर से इन सिद्धांतों का उच्चारण करते थे, उसके बाद सभी जिस अनुवाद पर सहमत होते थे, उसे ताड़पत्र पर उतार लिया जाता था। कई सदियों तक इस मंदिर की लाइब्रेरी में यह अनुवाद सुरक्षित रहा, लेकिन 1848 में मटाले विद्रोह के दौरान ये पूरी तरह नष्ट हो गया।
इसके बाद बौद्ध भिक्षुओं ने एक बार फिर से त्रिपिटका के अनुवाद का काम शुरू किया, लेकिन 1982 तक सिर्फ पहले तीन नियमों का अनुवाद ही हो पाया है।