परमहंस योगानंद ने तो यहां तक कह दिया कि जीवन मनोरंजन है और हम सब मनोरंजन करने और कराने आए हैं| वास्तव में यह जीवन का मर्म है और यही जीवन की सच्चाई है कि जीवन एक खेल है, एक प्रोग्रामिंग है| जैसे कि कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग होती है, उस प्रोग्रामिंग में कुछ वीडियो गेम्स होते हैं, इसका एक पूरा इंटरनल वर्ल्ड होता है, उसी तरह हमारा संसार है जिसमें हम सब वीडियो गेम के पात्र की तरह कुछ कैरेक्टर्स हैं और अपनी भूमिकाएं निभाये जा रहे हैं|

हम प्रारब्ध से बुरी तरह जकड़े हुए हैं,जो मनुष्य यह समझ लेता है कि उसके पास इस बात की स्वतंत्रता है कि वह अपने प्रारब्ध से अपने आपको मुक्त करके यूनिवर्स के फार्मूले से जुड़कर अपनी लाइफ को चेंज भी कर सकता है| आपके पास भी अवसर है, प्रारंभ करें आपको निश्चित रूप से कुछ चुनौतियां आती होगी, सीमाएं होंगी|

यदि आपका जन्म ऐसे घर में हुआ होगा जो बहुत ज्यादा सुविधा संपन्न ना हो या आपके आसपास ऐसी परिस्थितियां हैं जो आपको खुलकर स्वतंत्रता से जीवन नहीं जीने दे रही| फिर भी अपने आप को बदलने के अवसर हमेशा मनुष्य के पास मौजूद हैं|

विज्ञान भौतिक चीजों को मेनिफेस्ट करता है अध्यात्म अध्यात्मिक चीजों को मेनिफेस्ट करता है| अनंत काल से ये खेल चल रहा है कई पात्र इस खेल में शामिल होते हैं और उन पात्रों के चले जाने के बाद भी यह खेल चलता रहता है| हम रहे न रहें खेल चलता रहेगा| जब तक सृष्टि का विधान है जब तक यह सृष्टि चलेगी|

जीवन उत्पन्न होगा और उसी में विसर्जित हो जाएगा| बुलबुले की तरह जीवन उठता है और उसमें शामिल हो जाता है| लहरों की तरह जीवन उठता है और वापस उसी समुद्र में विलीन हो जाता है| न जाने कितनी लहरें इस समुद्र में उठती हैं और उसी में विलीन हो जाती हैं| यह तो जीवन का शाश्वत सत्य है जीवन का नियम है|

इस नियम को समझने के बाद हमें लाइफ की वास्तविकता भी पता चलती है| यह भी पता चलता है कि वास्तव में लाइफ मनोरंजन ही है| हम कितना ही रोए झोंके परेशान होना, इस प्रकृति को क्या फर्क पड़ता है| इसलिए बेहतर यह है कि जीवन को मनोरंजन माना जाए और उसे भरपूर जिया जाए|

कई लोग जीवन से इतने परेशान हो जाते हैं कि वह चाहते हैं कि जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जाएं परम तत्व में विलीन हो जाए, मुक्ति मिल जाए| लेकिन जब परमात्मा ने यह खेल निर्मित किया है तो इस खेल में निश्चित रूप से कुछ खिलाड़ी ऐसे होंगे जो इस में फंसे रहेंगे और कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होंगे जो इस खेल से बाहर हो जाएंगे या ऊपर के लोकों में चले जाएंगे, इस खेल के नेक्स्ट स्टेज में पहुंच जाएंगे| कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होंगे जो वापस पवेलियन लौट जाएंगे, कुछ महासमुंद में विलीन हो जाएंगे जहां आवागमन खत्म हो जाता है|

यदि हमें जीवन को जीना है तो बहुत हल्के ढंग से जीना पड़ेगा, बहुत ज्यादा बोझ लेकर नहीं| आपको अपनी प्राथमिकताएं खोजनी पड़ेगी| आपके अपने पैरामीटर्स होंगे उन पैरामीटर को यूनिवर्स के पैरामीटर मैच करना पड़ेगा और उसके आधार पर लाइफ को आगे बढ़ाना पड़ेगा|

ज्ञान की बातों, बुद्धिमत्ता और बौद्धिक जुगालिओं में बहुत ज्यादा उलझना नहीं है| बहुत छोटा सा फार्मूला है कि संसार एक रंगमंच है, हम अभिनेता है और नटराज, डायरेक्टर कोई और है| एक अभिनेता होते हुए भी हम अपने अभिनय को कैसे बेहतर ढंग से कर सकते हैं यह हमारे हाथ में है|

हर बात जो तथ्य और तर्क के साथ कही जाती है उस बात के विपरीत “तथ्य” “तर्क” भी इस सृष्टि में मौजूद होता है| इसलिए कोई भी बात परम सत्य नहीं होती| किसी भी बात पर आंख मूंदकर यकीन न करें|

हम किसी भी व्यक्ति को बहुत पहुंचा हुआ मान सकते हैं| उसके आभामंडल, लाव-लश्कर,उसकी प्रसिद्धि से हम यह सोच सकते हैं कि यह अंतिम सत्य बोल रहा है लेकिन अंतिम सत्य कोई भी नहीं बोल रहा| क्योंकि सब मानव है उनकी अपनी बुद्धि है, अपना चित्त है, अपना अहंकार है, अपना मन है| हर व्यक्ति अपने मन बुद्धि चित्त और अहंकार के अनुरूप बातों को लोगों के सामने रखता है|

एक समय ऐसा भी आता है जब सत्य की तलाश में मदद के लिए आपके अंदर एक दिव्य शक्ति पैदा हो जाती है| यह यूनिवर्स का चमत्कार है जो व्यक्ति तक पहुंचना चाहता है उसे सत्य तक पहुंचाने के लिए भी एक प्रोग्रामिंग इस यूनिवर्स में मौजूद है| वह प्रोग्रामिंग कुंडलिनी है|

हमारी सहजता-सरलता जिज्ञासा और गुरु कृपा के कारण ये प्रोग्रामिंग हमारे अंदर एक्टिवेट हो जाती है और फिर हम उसकी सहायता से सत्य की यात्रा पर निकल पड़ते हैं| यूनिवर्स चमत्कारों से भरा है| आपको जहां जाना है जिस लोक में जाना है, जिस स्थिति में जाना है उसे आपको मेनिफेस्ट करना पड़ेगा|

किसी को नेता बनना है तो लीडरशिप क्वालिटी विकसित करनी पड़ेगी| साथ उसको लीडर बनने के लिए इस यूनिवर्स से लगातार डिमांड करनी पड़ेगी, प्रार्थना करनी पड़ेगी| बहुत सहज-सरल फार्मूले हैं, लेकिन इन सब के बावजूद भी सहजता से खेलते हुए जीवन को जीना है|

कभी भी आप इस खेल से बाहर हो सकते हैं, आउट हो सकते हैं| कभी भी आपको वापस पवेलियन जाने को बोला जा सकता है| खेल में कौन कब हिट विकेट हो जाए कहा नहीं जा सकता|

प्रसन्न रहिए, खुश रहिए, जीत हार से डरिए मत, खेल को खेल की भावना की तरह लीजिए, मनोरंजन की तरह लीजिए, बहुत ज्यादा दिल पर मत लीजिए|

भगवान को जिस रूप में हम देखेंगे उस रूप में वह हमारे सामने आ जाएगा| क्योंकि यह हमारी मेनिफेस्टेशन पॉवर है| इस शक्ति का उपयोग हम भौतिक उन्नति में करें या आध्यात्मिक उन्नति में, यह हमारे ऊपर निर्भर है|

प्रकृति ने आपको ऑप्शन दिए हैं, आपका मनोरंजन किसमें होता है| आपको आत्मसंतुष्टि कहां मिलती है| आपका मन कहां लगता है, पवेलियन के अंदर लगता है या बाहर जाने में|

आपको इस संसार के चक्र से मुक्ति पानी है, जन्म-मरण से छुटकारा पाना है तो आप की दौड़ किसी और दिशा में होगी| जिसको यह जन्म-मरण के चक्र अच्छा लग रहा है जिसे जीना है, लोक-लोकांतर देखने हैं, इस ब्रह्मांड को और बेहतर ढंग से समझना है वो उस दिशा में आगे बढ़े|