महेश्वर में फंसे, पेशवा और अहिल्या घाट है। नर्मदा नदी के किनारे बने ये घाट महेश्वर आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होते है। इन घाटों पर यात्री साधु संत स्नान और ध्यान मग्न हो पूजा अर्चना करते दिखाई देते है। 

सुदूर क्षेत्रों से आये पर्यटक नर्मदा नदी में नाव से घूमने का लोभ संवरण नहीं कर पाते हैं। महेश्वर में भवानी माता का मंदिर, अहिलेश्वर शिवालय, राजवाड़ा, वाणेश्वर शिवालय, विठोजी की छतरी, राजराजेश्वर शिवालय, कालेश्वर, जालेश्वर, बाणेश्वर, पंढरीनाथ, काशी विश्वनाथ, मातंगेश्वर शिवालय, भरथरी गुफा दर्शनीय है। 

महेश्वर के मंदिर और घाटों पर सुबह शाम का परिवेश मन को सुकून और आनन्द पहुँचाने वाला होता है। महेश्वर में वर्ष 2018 में 9 लाख 83 हजार 244 पर्यटक आए, इनमें 9 लाख 81 हजार 966 भारतीय और 1248 विदेशी थे।

महेश्वर: श्रेणी, ऐतिहासिक, धार्मिक यह शहर हैहयवंशी राजा सहस्त्रार्जुन, ने रावण को पराजित किया था, की राजधानी रहा है। ऋषि जमदग्नि को प्रताड़ित करने के कारण उनके पुत्र भगवान परशुराम ने सहस्त्रार्जुन का वध किया था। 

कालांतर में महान देवी अहिल्याबाई होल्कर की भी राजधानी रहा है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर अपने बहुत ही सुंदर व भव्य घाट तथा महेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं जिनमे से राजराजेश्वर मंदिर प्रमुख है। 

आदि गुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ यहीं हुआ था। यह जिले की एक तहसील का मुख्यालय भी है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। खरगोन से 56 कि.मी.।

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महेश्वर...

कैसे पहुंचें:

वायु मार्ग द्वारा: निकटस्थ विमानपत्तन है इंदौर।

ट्रेन द्वारा: निकटस्थ रेल्वे स्टेशन 1. इंदौर 96 कि.मी. 2. खंडवा 120 कि.मी.

सड़क मार्ग द्वारा: इंदौर से 96 कि.मी., खंडवा से 120 कि.मी., मांडव से 40 कि.मी., ओंकारेश्वर से 66 किमी., खरगोन से 56 कि.मी...