पृथ्वी अनंत संभावनाओं का केंद्र है। तीन तरह के प्राकृतिक, गुण, शक्तियां यहां पर एक साथ मौजूद हैं। हम बहुत से लोगों से घिरे हुए हैं। उनमें से कुछ तमोगुणी होंगे, कुछ रजोगुणी होंगे, कुछ सतोगुणी।

हम जिस तरह के लोगों से घिरे होते हैं उसी तरह से हमारी लाइफ डिजाइन होती है, लाइफ की दिशा तय होती है। इस बात का ख्याल रखना बहुत जरूरी है कि हम किन लोगों के संपर्क में हैं? पैदा होते से ही आपके साथ लोग जुड़ना शुरू हो जाते हैं। व्यावहारिक जगत में भी अनेक तरह के लोग हमारी लाइफ में इंट्रोड्यूस होते हैं।

हम किससे इनफ्लुएंस होते हैं इसी से हमारी लाइफ की डायरेक्शन तय होती है..

जब हम सेल्फ असेसमेंट करते हैं तो हम पाते हैं कि हमारी लाइफ की जो स्थिति है, दिशा है, दशा है वह किस वजह से ऐसी है। जिसमें ज्यादातर भूमिका इनफ्लुएंसर की होती है। इनफ्लुएंसर न सिर्फ हमारे आसपास होते हैं बल्कि वह वर्चुअल जगत में भी होते हैं।

नेट पर भी इनफ्लुएंसर है, टेलीविजन पर भी और न्यूज़ पेपर में भी। जिससे हम प्रभावित होते हैं हैं, उनकी ऊर्जा का सीधा असर हमारी ऊर्जा पर पड़ता है, हमारे नेचर पर पड़ता है। यही बात समझने की है कि हमारे आसपास हमारे शारीरिक स्तर पर भौतिक स्तर पर मानसिक स्तर पर किन लोगों का प्रभाव है।

हम किस से प्रभावित हैं। यह एक इंपॉर्टेंट बात है जिस पर लोग कम ही ध्यान देते हैं।

जब हम पानी पीते हैं तो उसे फिल्टर क्यों करते हैं? इसलिए क्योंकि हमारे अंदर गंदगी नहीं जानी चाहिए, हम खाने को पकाते हैं, ज्यादातर खाद्य पदार्थों को हमें धोना पड़ता है, गर्म करना पड़ता है या पकाना पड़ता है. तब ही हम उन्हें खाते हैं इसकी वजह भी साफ है कि हम नहीं चाहते कि हमारे पेट में गन्दगी जाए। 

लेकिन हमारे आसपास के लोगों या इनफ्लुएंसर को हम फिल्टर नहीं करते हैं। 

क्या आपने कभी वहां फिल्टर लगाया है, क्या आपने मूल्यांकन किया है? उन लोगों में से कौन से ऐसे लोग हैं जिनसे आपकी ऊर्जा बढ़ेगी और कौन से ऐसे लोग हैं जिनसे आपकी ऊर्जा घटेगी। कौन से ऐसे लोग हैं जो आपको पूरी तरह दिवालिया कर देंगे, मानसिक शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर।

फिल्टर लगाना आपने जान लिया तो लाइफ की एक बड़ी जंग आपने जीत ली। कुछ इनफ्लुएंसर ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर हमें प्रभावित करते हैं और कुछ इनफ्लुएंसर ऐसे होते हैं जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से।

ऐसे कौन से लोग हैं जो हमारी लाइफ को डायरेक्टली ओर इनडायरेक्टली इंफ्लूएंस कर रहे हैं। कभी इसके प्रभाव में आ गए, कभी उसके प्रभाव में। कभी इसको सुन लिया, कभी उसको सुन लिया। आत्मज्ञानी कहते हैं प्रभाव में तो आना ही नहीं चाहिए। व्यक्ति के अंदर स्वयं की अंतर्चेतना है, बौद्धिक चेतना है, उसका मन है, मन के अनेक स्तर हैं।

उसके नैसर्गिक प्रेरणास्रोत है दृश्य जगत में भी और अदृश्य जगत में भी। अदृश्य मार्गदर्शक भी मौजूद हैं। तो फिर वह क्यों किसी से प्रभावित होता है?

क्यों आप किसी से इस कदर प्रभावित हो जाते हो कि आपकी अपनी बुद्धि, विवेक काम करना बंद कर देते हैं.

कोई एक्टर्स से प्रभावित है कोई डायरेक्टर्स प्रभावित है कोई नेताओं से प्रभावित है और कोई कथित गुरु से प्रभावित है।

जब तक आप की अंतर्चेतना आपकी सहज बुद्धि बोध विवेक थक हार कर यह मान ले कि यही अंतिम व्यक्ति है जिसकी मुझे सुनना चाहिए, यही अंतिम व्यक्ति है जो वास्तविक रूप से मेरी ऊर्जा को उन्नत कर सकता है, जो मुझे सतोगुण की तरफ आगे बढ़ा सकता है, उसी से प्रभावित होना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को सद्गुरु कहते हैं, जो आपको बदलने में महीनों नहीं लगाता बल्कि कुछ दिन में आपकी अंतर चेतना, कुंडलिनी, आत्मशक्ति जागृत कर देता है।

जो व्यक्ति अंतर चेतना जागृत करने की क्षमता नहीं रखता सिर्फ बातें करता है, विधियों में उलझाता है वह व्यक्ति सद्गुरु नहीं हो सकता| वो ज्ञानी हो सकता है, बुद्धिमान हो सकता है, अच्छा वक्ता हो सकता है| उससे प्रभावित होने का मतलब है उसके आधे अधूरे व्यक्ति का अनुयायी या चमचा बनना। जब तक हम फाइनल डिसीजन पर न पहुंचे तब तक सुनो सबकी करो मन की।

मन को विवेक से जोड़ें, विवेक को आत्मा से जोड़ें। जैसे-जैसे मन उन्नत होता जाएगा, उसकी विवेक शक्ति बढ़ती जाएगी, विवेक शक्ति आत्मा की ही शक्ति है। वही विवेक आप को सही रास्ते पर ले जाएगा।

धरती एक ऐसा ग्रह है जहां पर सत्व रज और तम तीनों प्रकार की शक्तियां एक साथ मौजूद होती है। धरती से जब हम मुक्त होते हैं तो हमें अपनी अपनी ऊर्जा के अनुसार स्थान मिलता है। 

जीवात्मा जगत में अलग अलग शक्तियों, जीवात्माओं के लिए अलग स्थान है। दुष्ट आत्माओं के लिए अलग स्थान है मिश्रित आत्माओं के लिए अलग स्थान है। लेकिन पृथ्वी एक ऐसी जगह है जहां पर तीनों प्रकार की जीवात्माएं शरीर का रूप लेकर मौजूद होती हैं। हर शक्ति का एक ही काम होता है वह अपनी ताकत में इजाफा करे।

यदि शक्ति सतोगुणी है तो वह ज्यादा से ज्यादा अपना अभिवर्धन करना चाहेगी, वह अपनी शक्ति में इजाफा करना चाहेगी, वह दूसरों को भी अपने जैसा बनाना चाहेगी, रज शक्ति भी ऐसा ही करेगी और तामसिक शक्ति भी। इनका प्रभाव हर मनुष्य में अलग-अलग स्तर पर होता है।

मनुष्य इन तीनों गुणों से मुक्त नहीं हो सकता लेकिन उसके स्तर अलग-अलग हो सकते हैं। 

हमें यह देखना है कि कौन सा मनुष्य ऐसा है जिसका सतगुण अधिक है बाकी गुणों की तुलना में। उस व्यक्ति के कांटेक्ट में रहना है, उस व्यक्ति से जुड़कर रहना है। हमें अपनी दिशा, दशा खुद तय करनी है।

राजनीतिज्ञ, लोगों की दुर्बलता का दुरुपयोग करते हैं। एक नेता भ्रष्ट भी है, बेईमान और चरित्रहीन भी, लेकिन उसके आगे-पीछे भी लाखों लोग घूमते रहते हैं। दरअसल वह आम लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाता है। आम लोगों की प्रवृत्ति होती है फॉलो करने की, किसी से प्रभावित होने की| इसी का फायदा राजनेता, नकली गुरु, नकली इनफ्लुएंसर, मॉडल्स, एक्टर्स एंड एक्ट्रेसेस उठाते हैं।

आप एक्टर और एक्ट्रेस से प्रभावित होते हैं उनका व्यक्तिगत जीवन देखिए वह आपसे भी ज्यादा जटिल है क्यों प्रभावित होते हो?

कोई व्यक्ति स्क्रीन पर आ रहा है, स्क्रीन पर बार-बार देखने के कारण आप उससे अटैच हो जाते हैं, उससे प्रभावित होने लगते हैं, उससे अपनी लाइफ को जोड़ लेते हैं. इससे आपकी ऊर्जा घटती है, आप की स्वतंत्रता में बाधा पड़ती है, वह व्यक्ति वैसा ही है जैसे आप हैं, अंतर इतना है कि वह स्क्रीन पर है और आप स्क्रीन पर नहीं हैं.

स्क्रीन पर हो जाने मात्र से कोई व्यक्ति शक्तिशाली नहीं हो जाता, इनफ्लुएंसर नहीं हो जाता, देखिए मनोरंजन करिए लेकिन प्रभावित मत होइए.

किसी भी राजनेता से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है.

कोई अच्छा कार्य कर रहा है प्रशंसा कीजिए लेकिन “अंध समर्थक” मत बनिए।

हर कॉलेज में एक लीडर है, हर क्लास में एक लीडर है, दोस्तों के हर ग्रुप में एक लीडर है, और वह अपने अनुसार सबको चला रहा है। वह अपने विचारों से दूसरों को प्रभावित कर रहा है। अपनी विचारधारा के आधार पर दूसरों को जानवरों की तरह हाकने की कोशिश कर रहा है।

“भेड़ मत बनिए।”